उत्तम कुमार, मुजफ्फरपुर। मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ योजना को लेकर इन दिनों विपक्ष और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। खासकर कांग्रेस केंद्र सरकार की इस योजना का खुलकर विरोध कर रही है। बिहार कांग्रेस इसे लेकर राज्य स्तर पर प्रदर्शन भी करने जा रही है। इस बीज आज शहर के होटल सभागार में पहुंचे केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण निषाद ने वीबी- जी राम जी योजना को लेकर प्रेस वार्ता किया और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला।

केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण निषाद ने कहा कि, राम का नाम जुड़ते ही कांग्रेस के लोगों को परेशानी हो जाती है। कांग्रेस को राम के नाम से नफरत है। जबकि महात्मा गांधी तो खुद ही राम राज्य की बात करते थे। उन्होंने कहा था “रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम और उनके अंतिम शब्द भी थे हे राम।

उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोंच हर गरीब को रोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़े वर्ग को रोजगार मिले, इसके लिए यह बिल लाया गया है। ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। यह पूरा बिल महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है।

केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री ने बताया कि, नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे, मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा। हर ग्रामीण परिवार को, जो बिना कौशल वाला काम करने को तैयार हो, हर साल 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा। वन क्षेत्रों में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति के कामगारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा।

उन्होंने बाताय कि, मनरेगा साल 2006 में लागू हुई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस पर 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें हमारी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि, रोजगार योजना का नाम पहले भी महात्मा गांधी जी के नाम पर नहीं था। 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम शुरू किया। जिसे राजीव गांधी सरकार ने जवाहर रोजगार योजना नाम दिया।सोनिया-मनमोहन सरकार ने 2004 में इसे NREGA किया, जिसे 2005 में MNREGA बना दिया गया। जब कांग्रेस सरकार ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?

केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री ने बताया कि, पहले आवास योजना का नाम ग्रामीण आवास योजना था। राजीव गांधी ने 1985 में इसका नाम बदलकर इंदिरा आवास योजना कर दिया। अप्रैल 2005 में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना बनाया गया, जिसे 25 जुलाई 2015 को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना किया गया। हर योजना में गांधी-नेहरू परिवार का नाम जबरन जोड़ा गया। मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है।

2005 में जब मनरेगा शुरू हुई, तब ग्रामीण बेरोजगारी बड़ी चुनौती थी। 2005 के बाद ग्रामीण भारत बदल चुका है। 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7% थी जो 2023-24 में घटकर 4.86% रह गई।कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और आजीविका में विविधता आई है। पुराना ओपन-एंडेड मॉडल अब आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता। 2005 की जरूरतें अलग थीं, 2025 की जरूरतें अलग हैं, इसलिए योजना को पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक था।

कांग्रेस सरकार के समय मनरेगा में घोटाले ही घोटाले थे। हमारी सरकार ने इस पर काफी हद तक नियंत्रण किया। पहले कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं थी, अब रियल-टाइम डेटा अपलोड, GPS, मोबाइल मॉनिटरिंग और AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन होगा। इससे सही लाभार्थियों को काम मिलेगा और जीवन स्तर सुधरेगा।

डाॅ राजभूषण ने कहा कि, देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं और पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार पर रखे गए। खेल रत्न पुरस्कार भी राजीव गांधी के नाम किया गया जबकि खेल में उनका कोई योगदान नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने या किसी के नाम पर योजना का नामकरण नहीं किया, बल्कि उसे सेवा से जोड़ा। कांग्रेस के पास कोई काम बचा नही है। इसीलिए धरना-प्रदर्शन कर लोगो को भटकाने का काम कर रही है बिहार की जनता ने उनको पहले ही सबक सीखा कर एक फोर-व्हीलर मे बैठने जीतना मेंडेट दिया है।

प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी प्रभात मालाकार, धानुका के अनुपम पाल, सुधीर शर्मा, डाॅ चक्रवर्ती, साकेत शुभम, राकेश पटेल आदि मौजूद रहें।

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