करनाल के इंद्री क्षेत्र में हुई बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गेहूं, मक्का और सब्जियों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों का कहना है कि उनकी छह महीने की मेहनत अब बर्बाद हो गई है और वे सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
मुकुल सतीजा ,करनाल। करनाल के इंद्री क्षेत्र में हुई बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गेहूं, मक्का और सब्जियों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
किसानों का कहना है कि उनकी छह महीने की मेहनत अब बर्बाद हो गई है और वे सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इस बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। गेहूं और मक्का की फसलें तो टूट गई हैं, वहीं खीरे और अन्य सब्जियों की फसल भी बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना है कि फसल पककर तैयार थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उन्हें बेबस कर दिया।
किसानों ने बताया कि इस बार गेहूं का दाना भी कम होगा। मक्का की फसल टूट गई और सब्जियों को भी नुकसान हुआ। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि समय पर गेहूं की खरीद की जाए और बर्बाद हुई फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए।
किसानों का दर्द
किसानों ने बताया कि फसल पककर तैयार थी, लेकिन अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ खत्म कर दिया। गेहूं की फसल में दाने कमजोर हो गए हैं, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। वहीं मक्के की फसल टूट गई और खीरे जैसी सब्जियों को भी भारी नुकसान हुआ है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द फसल का सर्वे कराया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
मंडी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
किसानों ने यह भी कहा कि एक तरफ प्राकृतिक मार झेलनी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर मंडियों में फसल बेचने में भी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि गेहूं की खरीद समय पर और सुचारू रूप से की जाए।
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