आगरा. योगी सरकार गाहे-बगाहे सुशासन का रट लगाती है, लेकिन सच कहें तो सुशासन की बातें सिर्फ भाषणों तक ही सीमित है. असलियत में तो यूपी में ‘कुशासन’ फैला हुआ है. अगर हकीकत में सुशासन नाम की कोई चीज होती तो संविदाकर्मी बिजलीकर्मी की मौत का सरकार और उसका सिस्टम मजाक नहीं बनाता. न ही संविदाकर्मी की बूढ़ी मां और उसकी विधवा अपने बच्चों को लेकर कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे न्याय के लिए बैठती. इसके बाद भी सुशासन सरकार का मुर्दा सिस्टम चूं से चां नहीं कर रहा. न ही सत्ता पक्ष का कोई जनप्रतिनिधि इस परिवार की मदद करने के लिए आगे आय़ा. ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इसी सुशासन की बात सीएम योगी करते हैं?

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बता दें कि बीते 15 अप्रैल 2025 को किरावली विद्युत उपकेंद्र पर ड्यूटी पर तैनात 38 साल के संविदाकर्मी पेट्रोलमैन रवि सोलंकी की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी. मामले में विभागीय लापरवाही होने की बात कही जा रही थी. जिसके बाद डीवीवीएनल के अफसरों ने 15 लाख रुपये, पेंशन और नौकरी का वादा किया था. वादा करने के बाद भी अधिकारियों ने मात्र 7.5 लाख रुपए ही दिए. पीड़ित परिवार के किसी भी सदस्य को न तो बाकी की रकम दी गई, न ही नौकरी और न ही पेंशन.

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ऐसे में पीड़ित परिवार को उसका हक नहीं मिला तो बूढ़ी मां और मृतक की पत्नी अपने बच्चों को लेकर धरने बैठ गई. धरने के 99 दिन बीत जाने के बाद भी ‘मुर्दा सिस्टम’ का कोई भी जिम्मेदार उनकी समस्या का निराकरण करने नहीं पहुंचा. ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि क्या सुशासन सरकार के अधिकारियों को किसी पैरवी का इंतजार है या फिर अधिकारी के रसूखदार लोगों का ही काम करेंगे?

मौज काट रहे ‘मोटी चमड़ी’ के अधिकारी?

हैरानी वाली बात तो ये है कि डीएम अरविंद बंगारी कई दफा दक्षिणांचल के अधिकारियों को पीड़ित परिवार को लेकर पत्र लिख चुके हैं. उसके बाद भी ‘मोटी चमड़ी’ के अधिकारी मौज काट रहे हैं. सवाल तो ये भी है कि आखिर मौत के इतने दिन बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय क्यों नहीं मिला? आखिर इनके न्याय के रास्ते में रोड़ा कौन बन रहा ? ऐसे गैरजिम्मेदारों के खिलाफ आखिर क्या कार्रवाई की जाएगी या फिर हमेशा की तरह चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा?