लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार वोटर लिस्ट में हेराफेरी की तैयारी कर रही है। भाजपा के लोग वोटरलिसट अपने हिसाब से बनाना चाहते है। भाजपा सरकार साजिश और षडयंत्र के तहत पीडीए समाज का वोट काटने और अपना वोट बढ़ाने का निर्देश दे रही है। एक अखबार में खबर आयी है कि सरकार ने हर बूथों पर 200 वोट बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह चुनाव आयोग की क्रेडिबिलटी पर सवाल है। क्या कल्पना की जा सकती है कि कोई दल वोट बढ़ाने के लिए निर्देश दे। इसके लिए अलग-अलग जिलों में अधिकारी भेजे जा रहे है। जो अधिकारी भेजे जा रहे है उनकी सूची कहां है।

वास्तविक वोटरों का ही नाम होना चाहिए

अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने सभी बीएलए और बूथ प्रहरियों को एक प्रारूप उपलब्ध कराया है। जो भी फर्जी और डुप्लीकेट मतदाता बनवाता दिखाई दे, उसके खिलाफ एफआईआर करायेंगे। एफआईआर का पूरा प्रारूप तैयार कराया गया है, उसमें केवल नाम डाल कर एफआईआर कर देनी है।जब एसआईआर की इतनी बड़ी प्रक्रिया चल रही है तो वोटरलिस्ट में केवल वास्तविक वोटरों का ही नाम होना चाहिए। उन्हीं का वोट बनना चाहिए लेकिन देखा जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची और केन्द्रीय चुनाव आयोग की मतदाता सूची में करोड़ो वोटों का अंतर आ रहा है। जबकि दो मतदाता सूची तैयार करने वाले बीएलओ और अधिकारी एक ही है।

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मतदाता सूचियों में इतना अंतर क्यों

अखिलेश यादव ने कहा कि जब मतदाता वही है अधिकारी और बीएलओ वही है तो राज्य और केन्द्रीय चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों में इतना अंतर क्यों है, कहां कमियां है। चुनाव आयोग को बताना चाहिए सही कौन सूची है। उम्म्मीद है कि चुनाव आयोग इन सभी सवालों का जवाब देगा। मतदाता सूची को आधार कार्ड से जोड़ा जाना चाहिए और आधार कार्ड मेटल का बनाया जाय जिसमें फर्जीवाड़ा न हो पाये। जानकारी मिली है कि 1.93 करोड़ वोटरों की मैपिंग हो जाने के बाद उन्हें अब अनमैप्ड कर दिया गया है। यह बेहद गंभीर मामला है कि एक बार मैपिंग के बाद लगभग दो करोड़ वोट फिर अनमैप्ड किये जा रहे है। बताया जा रहा है कि उसमें कोई एरर (त्रुटि) हुई है। यह एरर नहीं है भाजपा के लिए एरर किया गया है।

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आयोग को कौन तकनीकी सपोर्ट दे रहा

भाजपा जानबूझकर गलती कराती है जिससे लोग उलझ जायें। अगर मैपिंग के बाद फिर से अनमैप्ड किया गया है तो बहुत गंभीर सवाल है। अब इनको बीएलओ के माध्यम से नोटिस भेजकर जांच की जायेगी। इस तरह से कुल तीन करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जा रहा है। पहले बताया गया था कि मैपिंग वाले मतदाताओं को कोई नोटिस नहीं जायेगी।अखिलेश यादव ने कहा कि फिर सवाल उठ रहा है कि यह मैपिंग एप किसका है। चुनाव आयोग बताएं कि एप किसका बनाया हुआ है? आयोग को कौन तकनीकी सपोर्ट दे रहा है? आयोग विपक्ष को बताए कि एप किसका है? अगर एप उस कम्पनी का है, जिसने भाजपा को इलेक्टोरल बांड से चंदा दिया है तो यह बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर भाजपा को चंदा देनी वाली कम्पनी मैपिंग कर रही है वही डेटा मैनेजमेंट कर रही है इसका मतलब है लाखों वोट डिलीट कर विपक्ष को उलझाए रखने की साजिश है।

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अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा मुद्दों से नहीं जीत सकती है। वहां वोटो की हेराफेरी कर प्रशासन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के चुनाव को प्रभावित करने की तैयारी हो रही है। यह भी सुनने में आ रहा है कि भाजपा की विचारधारा से जुड़े अधिकारियों को जिलों में सुनवाई (हियरिंग) के लिए लगाया गया है। हमारी मांग है कि ऐसे अधिकारियों के बारे में बताया जाय। पहले भी देखा गया भाजपा सरकार चुनाव में जाति के आधार पर अधिकारियों की तैनाती करती है।भाजपा दबाव डालकर विपक्ष के वोट डिलीट कराना चाहती है और पहले जो फर्जी और डबल, ट्रिपल वोट था वो वोट दोबारा जोड़ना चाहती है। इसलिए सभी बीएलए को एफआईआर कराने के लिए प्रारूप उपलब्ध कराया जा रहा है।