लखनऊ. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने कहा, उप्र में भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों द्वारा ‘पलायन का प्रोपोगंडा’ फैलाना दरअसल 9 साल पुरानी भाजपा सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है. सच तो ये है जिसने भी, पलायन के झूठ को फैलाने वाले न तो उप्र के हितैषी हैं और न ही प्रदेशवासियों के. भाजपा द्वारा ऐसे मिथ्या प्रचार से उप्र की छवि को गहरी ठेस पहुंचती है और इंवेस्टर निवेश करने नहीं आते हैं.

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आगे अखिलेश यादव ने कहा, मानसिक स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार लोगों में विश्वास नहीं जगा पाई. सामाजिक स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार अपनी नफरत की साम्प्रदायिक राजनीति की वजह से समाज में सौहार्द नहीं ला पाई. आर्थिक स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार लोगों को रोज़गार नहीं दे पाई. रोजगार के स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार ने गुजरात के लोगों को कारोबार और ठेकों में उप्र के लोगों से ज़्यादा काम दिया। इसलिए काम की तलाश में लोगों को नाउम्मीद होकर दूसरे राज्यों में जाना पड़ा.

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⁠आगे अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि नीति और योजना के स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार की स्किल मैपिंग का कोई भी नतीजा नहीं निकला और लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में बाहर जाने को मजबूर हुए. जनसांख्यिकी स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार उप्र का संतुलित विकास नहीं कर पाई. देश के स्तर पर इसका मतलब ये हुआ कि भाजपा सरकार अरबपतियों को सकारात्मक वातावरण नहीं दे पायी, न ही जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद करने वालों को कोई आश्वासन दे पाई और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के एजुकेशनल इंस्टीट्यूट बना पाई और इन सब वजहों से ही पिछले 11 सालों में ऐतिहासिक रूप से भारतीयों का विदेश पलायन हुआ है.

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उप्र के निवासी समझें कि उप्र की छवि को धूमिल करने की कोशिश में कौन लोग लगे हैं और किसके इशारे पर ऐसा किया जा रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं कि ‘डबल इंजन’ की गलतफहमी फैलाकर कोई एक-दूसरे के नीचे से पटरी-पटरा सब खींच रहा है. सच्चाई तो ये है कि डबल इंजन तभी अच्छे साबित होते हैं, जब एक दिशा में चलें ना कि तब जब आमने-सामने हों. उत्तर प्रदेशवाले अब न तो इन भाजपाई गुटबाज़ों के शिकार होंगे, न ही भाजपाई गुटबाजी के. भाजपा जाए तो उप्र की छवि सुधर जाए!