अलीगढ़. प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस और सुशासन की बात करते थकते नहीं. दावा किया जाता है कि उनके नेतृत्व में प्रदेश की कानून व्यवस्था एकदम चंगा है, लेकिन ये केवल दावा ही है. हकीकत तो कुछ और ही है. प्रदेश की कानून व्यवस्था बद से बदतर स्थिति में है. अगर ऐसा न होता तो रेप पीड़िता का केस दर्ज करने के लिए पुलिस वाला अपने साथ सोने की डिमांड न रखता. हालांकि, रेप पीड़िता ने जब मामले की शिकायत एसएसपी से की तो आरोपी पुलिस वाले को निलंबित कर दिया गया. आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

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बता दें कि पूरा मामला क्वार्सी थाने का है. जहां एक महिला के साथ शादी का झांसा देकर रेप किया गया. पीड़िता अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंची. जहां मुख्य आरक्षी ने रेप पीड़िता से उसका शिकायत पत्र लिया और अपना नंबर देकर उसे घर भेज दिया और घर जाकर व्हाट्सएप कॉल करने के लिए कहा. जब महिला ने फोन किया तो मुख्य आरक्षी ने कहा, अगर तुम्हें केस दर्ज कराना है तो मेरे साथ होटल चलकर शारीरिक संबंध बनाने होंगे. मैं भी मुसलमान हूं और तुम भी मुसलमान हो.

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इतना ही नहीं पुलिस वाले ने पीड़िता के साथ गंदी बातें भी की. इस दौरान पीड़िता से उसकी अश्लील फोटो भी मांगी. साथ ही यह भी कहा कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो किसी केस में फंसाकर उसे भी जेल भेज देगा. जिसके बाद पीड़िता ने पुलिस वाले की रिकार्डिंग और उसके द्वारा किए गए मैसेज को एसएसपी को जाकर दिखाया. मामला सामने आते ही एसएसपी ने मुख्य आरक्षी इमरान को निलंबित कर दिया. साथ ही केस दर्ज करने के भी निर्देश दिए.

न्याय के लिए कीमत चुकानी होगी ?

इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठ रहा है. सवाल ये कि क्या आम आदमी के लिए अब न्याय पाना इतना मुश्किल हो चुका है कि उसको उसकी कीमत चुकानी पड़े? सवाल ये भी कि जब प्रदेश के मुखिया डंके की चोट पर जीरो टॉलरेंस का दावा करते हैं तो उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति हकीकत में दिखाई क्यों नहीं देती या फिर बयानों तक ही सीमित है?