अनूप मिश्रा, बहराइच. यूपी का सिस्टम सड़ चुका है. सिस्टम में बैठे जिम्मेदारों ने लापरवाही की सारी सीमाएं पार कर दी है. अंधे सिस्टम के लापरवाह अधिकारियों ने एक जिंदा इंसान को कागजों में मुर्दा करार दे दिया. इस लापरवाही के चलते पीड़ित और उसका परिवार भारी मानसिक परेशानी से जूझ रहा है.
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बता दें कि पूरा मामला पूरा मामला विकास खंड विशेश्वरगंज के ग्राम पंचायत लख्खा रामपुर का है. जहां रहने वाला धर्मेंद्र मौर्या (28) जब राशन कार्ड बनवाने के लिए जनसेवा केंद्र पहुंचा, तो वहां उसे बताया गया कि वह सरकारी अभिलेखों में पहले ही मृत दर्शाया जा चुका है. यह सुनकर युवक स्तब्ध रह गया और तुरंत घर लौट आया. खबर मिलते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई.
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पीड़ित धर्मेंद्र मौर्या का कहना है कि वह अपनी पहचान और दस्तावेज़ों को दुरुस्त कराने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों के कार्यालयों के लगातार चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला. अधिकारियों की उदासीनता के कारण परिवार मानसिक तनाव में है. हैरानी की बात यह है कि परिवार रजिस्टर की नकल में धर्मेंद्र मौर्या जीवित दर्ज है. परिवार ने 28 जनवरी को परिवार रजिस्टर की नकल भी बनवाई थी, जिसमें उसकी स्थिति स्पष्ट रूप से जीवित अंकित है. इसके बावजूद अन्य सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत दिखाया जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
बार-बार गलती करने से बाज नहीं आ रहे जिम्मेदार
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई? किसी जिंदा इंसान को ऐसे कैसे मृत घोषित कर दिया गया. ये पहला मामला नहीं है, जब इस तरह का मामला सामने आया हो. इससे पहले भी इस तरीके के मामले सामने आ चुके हैं. इसके बाद भी यूपी का सिस्टम अपनी गलतियों को सुधारने में नहीं, वही गलती दोबारा दोहराने में मस्त है.
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