गोविंद पटेल, कुशीनगर। जिले के कसया थाना क्षेत्र के महुई खुर्द (छोटका टोला) में विवादित भूमि को लेकर हालात अचानक विस्फोटक हो गए। जिस जमीन पर अदालत ने साफ तौर पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, उसी भूमि पर कथित तौर पर निर्माण शुरू होने से तनाव भड़क गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण रोकने के बजाय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित पक्ष को ही हिरासत में लेना शुरू कर दिया, जिससे माहौल भड़क उठा और देखते ही देखते महिलाएं पुलिस के सामने डट गई।

अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई थी

मामला सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कसया न्यायालय में लंबित है, जहां वाद संख्या 116/2026 में अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया था कि अगली सुनवाई तक जमीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वादी की ओर से आदेश 39 नियम 1 व 2 सीपीसी के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई थी, जिसे सुनते हुए अदालत ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर दिया और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

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दोनों पक्षों को थमाया नोटिस

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि आदेश का उल्लंघन अवमानना की श्रेणी में आएगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुंची और कथित तौर पर पीड़ित पक्ष के लोगों को ही पकड़ने लगी। इससे गांव की महिलाएं भड़क उठीं और पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हालात इतने बिगड़े कि ईंट-पत्थर चलने लगे। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई किए जाने के आरोप सामने आए।

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गांव में भय और आक्रोश का माहौल

ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने घरों में घुसकर महिलाओं को बाहर खींचा, जमकर डंडे बरसाए और नाबालिग बच्चियों तक को नहीं छोड़ा। आरोप यह भी है कि कई महिलाओं को थाने ले जाकर भी मारपीट की गई। इसके बाद पुलिस ने 34 नामजद और सैकड़ों अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया और कई लोगों को जेल भेज दिया गया। घटना के बाद गांव में भय और आक्रोश दोनों का माहौल है।

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जिन महिलाओं को जेल भेजा गया, उनके दुधमुंहे बच्चों के रोते-बिलखते दृश्य ग्रामीणों को विचलित कर रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि जब अदालत का आदेश साफ था, तो फिर मौके पर स्थिति इतनी बिगड़ने कैसे दी गई। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।