लखनऊ. अखिलेश यादव एसआईआर की प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, माननीय न्यायालय, निर्वाचन आयोग व समस्त पत्रकार इस बड़े षड्यंत्र का संज्ञान लें कि एसआईआर के तहत गांवों में छपे-छपाये फार्म 7 (जिसके माध्यम से आपत्ति करके कोई अन्य किसी का नाम कटवाने की साज़िश कर सकता है) कौन भेज रहा है. इसमें जो शिकायतकर्ता हैं उनका कोई अता-पता नहीं है. फर्ज़ी हस्ताक्षर करवाकर, विपक्ष के वोट काटने की साज़िश की जा रही है. पीडीए समाज ख़ासतौर से अल्पसंख्यक के नाम बड़े स्तर पर काटे जा रहे हैं, जिसके नाम की आपत्ति की जा रही है, उसे भी नहीं मालूम है कि उसका नाम सब कुछ सही होने के बावजूद काटा जा रहा है.
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अखिलेश यादव ने कहा कि सभी न्यूज़ न्यूज़ चैनलों, अख़बारों से अपील है कि वो इस महा-घोटाले का पर्दाफाश करें. हम स्थानीय यूट्यूबर और लोकल न्यूज़ कर्मियों से लोकतंत्र के हित में ये मांग करते हैं कि आप इस महाघोटाले का भंडाफोड़ करें और अपने स्तर पर प्रकाशित-प्रसारित करें. हम उनको पूरे देश-प्रदेश के सामने रखेंगे व आपकी ईमानदार पत्रकारिता को सच्चे दर्शकों-पाठकों तक पहुंचाएंगे.
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अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर में ‘फॉर्म 7’ के माध्यम से भाजपा द्वारा प्रदेश के कई जिलों से पीडीए और ख़ासतौर पर अल्पसंख्यकों के वोट कटवाने की जो साज़िश की जा रही है, उसका तत्काल संज्ञान लिया जाए. उन्होंने कहा कि बेईमानी पर उतारू, ये घपलेबाज भाजपाई अपने विमुख हो चुके पन्ना प्रमुख तक ढूंढकर नहीं ला पा रहे हैं, वोटर कहां से लाएंगे. भाजपाई इस बार जाएंगे तो फिर कभी नहीं आएंगे. उनकी हार की हताशा चुनावों से पहले ही कमीशन के बंटवारे की लड़ाई, आपसी सर फुटव्वल और बंधकबाजी में दिखने लगी है.
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