लखनऊ. अखिलेश यादव ने बजट को लेकर भाजपा पर हमला बोला है. उन्होंने कहा, केन्द्रीय बजट निराशाजनक और गरीब के समझ से परे है. बजट ने किसानों, नौजवानों, व्यापारियों, महिलाओं को निराश किया है. आम जनता के लिए कुछ नहीं है. शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा हुई है. बिना शिक्षा के विकसित भारत कैसे बनेगा. यह बजट सिर्फ सपने दिखाने वाला है. भाजपा से आम जनता को कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए बजट से भी कोई उम्मीद नहीं है. भाजपा बजट के माध्यम से अपने लोगों को सेट करती है. केवल 5 फीसदी लोगों के लिए बजट लाती है. भाजपा देखती है उनके अपने लोगों का मुनाफा और तरक्की कैसे हो.

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने जो वादे किये थे उन्हें पूरे नहीं किए. किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, मंहगाई बढ़ती जा रही है. नौजवानों के लिए रोजगार नहीं है. भाजपा सामाजिक न्याय के नाम पर गुमराह करती है. सरकार के पास जवाब नहीं है. सरकार को बताना चाहिए कि 95 फीसदी जनसंख्या की प्रति व्यक्ति आय क्या है. देश में पर्यावरण की स्थिति भयावह है. दुनिया के सबसे बड़े प्लेटफार्म पर यह सवाल खड़ा हो गया कि देश की हवा ही ठीक नहीं है, जिससे लोगों की जानें जा रही हैं और इन्वेस्टमेंट नहीं आ रहा है.

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उन्होंने कहा कि अच्छा बजट वो होता है, जिससे गरीब की तरक्की हो, खुशी हो, उनके चेहरे पर मुस्कान आए, लेकिन इस बजट में “महंगाई को रोकने के लिए, शिक्षा को बेहतर करने के लिए कोई इंतजाम नहीं. अगर बुनियादी ढांचा नहीं है, तो एआई क्या करेगा?“ गंदे पानी से लोगों की जान चली गई है, क्या यही इस सरकार की स्मार्ट सिटी है? क्या यही विकसित भारत है?“ जो बुलेट ट्रेन 1 लाख करोड़ की बननी थी वह बुलेट ट्रेन आज 2 लाख करोड़ की बन रही है. बजट बढ़ता जा रहा है.

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सपने दिखाकर गरीब, किसान, मध्यम वर्ग का वोट ले लेती है लेकिन बजट सिर्फ 5 फीसदी लोगों के लिए बनाती है. भाजपा सरकार से गरीब, किसान, मध्यम वर्ग गांव में रहने वालों के लिए कोई उम्मीद नहीं है. भाजपा रिफार्म नहीं डिफार्म कर रही है. यही स्थिति रही तो महिलाओं को लोहे पर पीतल की लगाकर जेवर पहनने पड़ेंगे. आज गरीब असली जेवर नहीं खरीद सकता. भाजपा सरकार बुनियादी ढांचा भी खत्म कर रही है. किसानों की मंडी के लिए कुछ नहीं किया है. दुग्ध क्षेत्र के लिए कुछ नहीं है. आलू खरीद और रखरखाव के लिए बजट में कुछ नहीं है.

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आगे अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा है. यूपी में एम्स में बुनियादी सुविधाएं नहीं है. तकनीकी स्टाफ और डॉक्टर नहीं है. आम गरीब को बिजली मंहगी है, जो बिजली बना रहे है वे हजारों करोड़ के मुनाफे में है. देश में नदियों का बुरा हाल है. नदियों में भारी गंदगी है. मां गंगा और नदियों की सफाई नहीं हुई. गंगा मां को साफ करने के लिए उसकी सहायक नदियों को साफ करना पड़ेगा. नदियों को साफ करने के लिए भाजपा सरकार की न कोई नीति है और न नीयत है. बजट में उत्तर प्रदेश को एक भी एक्सप्रेस-वे नहीं मिला. भाजपा सरकार की योजनाएं अदृश्य होती है.

अखिलेश यादव ने कहा कि 2026 बजट का परिणाम है मार्केट धड़ाम. इस बजट में न आम जनता का ज़िक्र है न फ़िक्र. महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है. अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं, लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है. मध्यम वर्ग अपने को ठगा महसूस कर रहा है. शोषित, वंचित, ग़रीब व्यक्ति जहां था उससे भी नीचे जाता दिख रहा है. इस बजट ने उसके चादर में पैबंद लगाने की जगह, उसे और चिथड़ा कर दिया है, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा शाब्दिक औपचारिकता तक सीमित होकर रह गई है. किसान, मज़दूर, श्रमिक, कारोबारी, छोटा दुकानदार अपने लिए मिली राहत को दूरबीन लेकर भी ढूंढ नहीं पा रहा है.