लखनऊ. एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट को लेकर अखिलेश यादव ने सवाल खड़े करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ये ‘डबल इंजन’ की सरकार है या ‘डबल ब्लंडर’ की सरकार है. विधानसभा में वोटरों की संख्या तथा पंचायत और नगर निकाय में वोटरों की संख्या में लाखों का अंतर कैसे है? स्पष्टीकरण अपेक्षित है!

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आगे अखिलेश यादव ने कहा, उत्तर प्रदेश विधान सभा मतदाता सूची (SIR के बाद, प्रारूप- 2026): 12.56 करोड़ मतदाता उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची (SIR संशोधित अस्थायी-2026): 12.70 करोड़ मतदाता, उत्तर प्रदेश नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची (चुनाव वर्ष-2023): लगभग 4.32 करोड़ मतदाता. यदि यह भी मान लिया जाए कि उत्तर प्रदेश नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची में त्रुटियां हैं और SIR के बाद इसमें अधिकतम 25% (लगभग 1.08 करोड़) मतदाताओं की कमी आती है, तो सुधार के बाद ULB मतदाता सूची में लगभग 3.24 करोड़ मतदाता शेष रहने चाहिए.

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आग उन्होंने ये भी कहा कि इस स्थिति में उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची (SIR संशोधित अस्थायी-2026) और उत्तर प्रदेश नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची का कुल योग लगभग 15.80 करोड़ मतदाता होता है. समाजवादी पार्टी इन आंकड़ों के आधार पर यह प्रश्न उठाती है कि लगभग 3 करोड़ मतदाता कहां गायब हो गए. क्या भारतीय जनता पार्टी के दबाव में निर्वाचन आयोग (ECI) पिछड़े वर्गों, दलितों, आदिवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के मताधिकार को सीमित या दबाने का प्रयास कर रहा है?