
विक्रम मिश्र, लखनऊ. जनता को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, जबकि हर जिले का अपना मेडिकल कॉलेज हो इसकी परिकल्पना को भी सिद्ध करने में सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. बावजूद इसके प्रदेश में सरकारी हॉस्पिटल में पदस्थ चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर ध्यान दे रहे हैं. लगातार मिल रही शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सूबे के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 4 डॉक्टरों पर गाज गिरी है. डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोपी चारों डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
नॉन प्रैक्टिस अनाउंस मिलता है
उत्तर प्रदेश में डॉक्टर्स की ग्रेड के लिहाज से नॉन प्रैक्टिस अनाउंस भी सरकार की तरफ से दिया जाता है, जिससे सरकारी डॉक्टर्स किसी भी प्रकार से किसी अन्य प्राइवेट व्यवस्था में न जाएं. इसके बावजूद कुछ डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं. इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है. ब्रजेश पाठक की छापेमारी में संतकबीर नगर के तीन चिकित्साधिकारी और वाराणसी के एक चिकित्साधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को निर्देशित किया गया है.
इन पर गिरी गाज
संत कबीर नगर के जिला चिकित्सालय में सर्जन डॉ. संदीप कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार गुप्ता, ईएनटी सर्जन डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, वाराणसी स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविन्द प्रसाद पर कार्रवाई हुई.
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