लखनऊ. प्रदेश में सुशासन मानो अपने चरम पर है. सुशासन ऐसा कि सिस्टम जिंदा इंसान को कागजों में मार दे रहा है. जिसकी वजह से बुजुर्ग दंपति अब अपनी पेंशन पाने के लिए दर-दर की ठोकरे खाने पर मजबूर है. अब दोनों दफ्तर के चक्कर काटकर अपने जिंदा होने का सबूत दे रही है. वहीं जिम्मेदार अपनी लापरवाही को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. क्या अधिकारी नशे में काम कर रहे हैं, जो जीते जी इंसान को मुर्दा करार दे रहे हैं? क्या यही योगी सरकार का सुशासन है?
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बता दें कि पूरा मामला मोहनलालगंज तहसील से सामने आया है. जहां समाधान दिवस का आयोजन किया गया था. समाधान दिवस पर जुर्ग दंपति जय नारायण और राम दुलारी अधिकारी के सामने पहुंचते ही रो पड़े. दोनों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि शिकायत के बावजूद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि, अधिकारी ने पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट तलब की है और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया है.
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लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई कब?
सवाल सिर्फ वृद्ध के पेंशन का नहीं है. सवाल सिस्टम में बैठे लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों का है. आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई? किसी जिंदा इंसान को ऐसे कैसे मृत घोषित कर दिया गया. ये पहला मामला नहीं है, जब इस तरह का मामला सामने आया हो. इससे पहले भी इस तरीके के मामले सामने आ चुके हैं. इसके बाद भी योगी सरकार का सिस्टम अपनी गलतियों को सुधारने में नहीं, वही गलती दोबारा दोहराने में मस्त है.
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