रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फर्जी फॉर्म-7 का बड़ा खेल सामने आया है. शहर के बूथ नंबर 166 पर 99 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 भरा गया, जिस पर श्रीराम नाम का व्यक्ति आपत्तिकर्ता बताया गया. फॉर्म में उनका मोबाइल नंबर और EPIC नंबर भी दिया गया था. जब बीएलओ ने श्रीराम को फोन किया तो उन्होंने पूरी तरह इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वे गायत्री पुरम में किराए के मकान में रहते हैं और उन्हें किसी आपत्ति की कोई जानकारी नहीं है. मतदाताओं को जब यह पता चला तो बूथ पर पहुंचकर बीएलओ से फॉर्म दिखाने को कहा. बीएलओ ने फॉर्म दिखाया, लेकिन श्रीराम ने फोन पर कहा कि उन्होंने कोई फॉर्म नहीं भरा.

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मतदाताओं का कहना है कि वे उसी इलाके में लंबे समय से रह रहे हैं और उनके पास सभी वैध दस्तावेज हैं. फिर भी फर्जी फॉर्म से उनके नाम कटवाने की कोशिश हो रही है. आरोप है कि वर्ग विशेष (PDA समाज) के मतदाताओं को साजिशन वोट से वंचित करने के लिए फर्जी फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है.

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सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव, बछरावां विधायक श्याम सुंदर भारती और प्रदेश सचिव शशिकांत शर्मा ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा. उन्होंने कहा कि जिले की सभी विधानसभाओं में हजारों PDA मतदाताओं के नाम फर्जी फॉर्म-7 से हटाए जा रहे हैं. यह लोकतंत्र पर हमला है. वहीं सलोन विधानसभा के बूथ नंबर 23 (जीआईसी डीह) पर भी करीब 100 फर्जी फॉर्म-7 का मामला सामने आया था. वहां बीजेपी मंडल अध्यक्ष के निर्देश पर श्री अवध ने फॉर्म दिए थे, जबकि सभी मतदाता जीवित और उसी बूथ पर रहते हैं. सपा ने मांग की है कि फर्जी फॉर्म-7 तुरंत रद्द हों, जांच हो और दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो. प्रभावित मतदाताओं को सलाह है कि वे फॉर्म-6 भरकर नाम बहाल करवाएं और दस्तावेज जमा करें. प्रशासन अभी चुप है?