लखनऊ. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव लगातार एसआईआर की प्रक्रिया सवाल खड़े कर रहे हैं. एक बार फिर इस मामले को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर हमला बोला है. अखिलेश यादव ने कहा, भाजपा का फर्जीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आंख का विस्तारपूर्वक विवरण, फर्जी फॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे वो सब PDA हैं. पिछड़े हैं, दलित हैं, अल्पसंख्यक-मुस्लिम हैं.
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आगे अखिलेश यादव ने कहा, नाम कटवाने के षड्यंत्र की सूची में कहीं कुर्मी, कहीं पटेल, कहीं पाल, कहीं मौर्य, कहीं लोध, कहीं लोधी, कहीं कुर्मी, कहीं यादव, कहीं पासी, कहीं पासवान, कहीं निषाद, कहीं मल्लाह, कहीं केवट, कहीं कश्यप, कहीं कुम्हार, कहीं प्रजापति, कहीं सोनकर, कहीं कोरी, कहीं अंसारी, कहीं भारती, कहीं पटेल, कहीं कनौजिया, कहीं बिंद, कहीं सैंथवार, कहीं भर, कहीं राजभर, कहीं कुंजरा, कहीं रयीन, कहीं गुर्जर, कहीं गडेरिया, कहीं गद्दी, कहीं घोसी, कहीं माली, कहीं सैनी, कहीं मणिहार, कहीं काचर, कहीं हज्जाम, कहीं सलमानी, कहीं तेली, कहीं समानी, कहीं रोगंगर, कहीं धोबी, कहीं लाखेर, कहीं गंगवार, कहीं बाथम, कहीं जाट, कहीं कोई अन्य पीडीए.
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आगे अखिलेश यादव ने कहा, ये सूची और भी लंबी हो सकती है, अगर चुनाव आयोग AI से निकलवाकर वो सूची दे दे, जो भाजपा ने उनको वोट काटने के लिए दी है या कहें भाजपा से उन्हें मिली है. सुनवाई के लिए 1-2 किमी के अंदर सुनवाई केंद्र बनाए जाएं और सुनवाई में अनसुनी न की जाए. पंचायत चुनाव को आरक्षण के नाम पर फंसाकर भाजपा सरकार इसलिए टाल रही है कि क्योंकि वो जानती है कि गांव-गांव तक जनता उनके विरुद्ध वोट डालने के लिए तैयार बैठी है और भाजपा हजार घपले-घोटाले के बावजूद भी जीतने की स्थिति में नहीं है. ये सरकार न जनगणना कर रही है, न जाति गिन रही है. भाजपा पूरी तरह नाकाम सरकार है.
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जिनके नाम काटने की कोशिश हो रही हैं, सबकी कहानी एक ही जगह जाकर जुड़ती है, जाति से. जिन्होंने कटवाए – वो कौन हैं? वो सब भाजपा के वर्चस्ववादी, सामंतवादी, प्रभुत्ववादी लोग हैं या उनके संगी-साथी, जिनकी पीठ पर प्रशासन का हाथ है, और हाथ में चुनाव आयोग की ढाल है. उन्हें पता है कि वो फर्जी फॉर्म-7 भरेंगे, और चुनाव आयोग, प्रशासन कुछ नहीं करेगा, पर समाजवादी पार्टी अपनी लड़ाई लड़ेगी. जिला प्रशासन के पास भी जाएगी, और सुप्रीम कोर्ट तक भी. PDA वाले कयामत तक लड़ेंगे अपने PDA के वोट के अधिकार की लड़ाई क्योंकि वोट छिना तो सब छिन जाएगा. पीडीए प्रहरी सावधान रहें और वोट कटनेवाले हर पीड़ित की सहायता करें. निगरानी बढ़ा दें, और अपना नारा याद रखें- एक भी वोट न कटने पाए! एक भी वोट न घटने पाए!.
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