मथुरा. यूपी का सिस्टम सीएम योगी के दावों में तो सुफरफास्ट है. लेकिन असल में सुस्त और लापरवाह है. सुस्ती ऐसी कि खुद को जिंदा साबित करने के लिए एक वृद्धा 26 साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाती रही, लेकिन मजाल है कि योगी सरकार के नुमाइंदे उसे कागज में जिंदा कर देते. वृद्धा कागजों और योगी सरकार के सिस्टम के फेर में ऐसे फंसी की अंत में उसने दम तोड़ दिया. इस मामले ने न सिर्फ योगी सरकार के सिस्टम की पोल खोली है, बल्कि सुशासन सरकार के खोखले दावों पर भी सवाल उठे हैं. सवाल ये कि क्या योगी सरकार की सुशासन सरकार में ऐसा ही होगा?

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बता दें कि पूरा मामला सुरीर थाने के सुरीर कलां बांगर का है. जहां सिस्टम की लापरवाही उजागर हुई है. 98 वर्षीय वृद्धा विद्या देवी के बेटे ने योगी सरकार की पोल खोलते हुए बताया कि उनकी मां के माता-पिता ने उनके नाम 6.42 एकड़ जमीन की थी. जिसके बाद उनके रिश्तेदारों ने 19 करोड़ की जमीन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाकर विद्या देवी को मृत घोषित करवा दिया.

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शातिरो ने मर चुके नाना को जिंदा दिखाकर जमीन को अपने नाम करवा ली. वहीं जमीन को वापस लेने के लिए विद्या देवी खुद को जिंदा साबित करने में जुट गई. 26 सालों तक विद्या देवी ने पुलिस, प्रशासन और कोर्ट के चक्कर काटे, लेकिन खुद को कागजों में जिंदा करने में सफलता नहीं पाई. वहीं इस लड़ाई को लड़ते-लड़ते विद्या देवी की 98 साल की उम्र में बीते दिनों मौत हो गई. वृद्धा के बेटे की शिकायत पर तत्कालीन डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने एसडीएम को जांच निर्देश दिए. जांच के बाद पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. वहीं तीसरा फरार चल रहा है.