वाराणसी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने वंदे मातरम और सुप्रीम कोर्ट को लेकर विवादित बयान दे दिया। मदनी के इस बयान पर सियासत गरमा गई। मौलान के बयान पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी आमने सामने आए गए। अजय राय का कहना है कि सरकार महंगाई को छिपाने, जनता को गुमराह करने के लिए सिर्फ हिंदू-मुस्लिम कर रहे हैं। वहीं राकेश त्रिपाठी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की आज कोई प्रासंगिकता नहीं रही है, अपने आप को सुर्खियों में लाने के लिए वे इस तरह की बातें कर रहे हैं।

सरकार का काम हिंदू-मुस्लिम करके मुद्दों को दबाना

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के बयान पर कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, वे अपनी नाकामियों को छिपाने, बेरोजगारी और महंगाई को छिपाने, जनता को गुमराह करने के लिए सिर्फ हिंदू-मुस्लिम कर रहे हैं। लेकिन जनता समझ गई है और जानती है कि चीजें क्या हैं। आज एक महीने में 12 राज्यों में SIR हो रहा है। सरकार का एकमात्र काम हिंदू-मुस्लिम करके सभी मुद्दों को दबाना है।

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राकेश त्रिपाठी ने की कार्रवाई की मांग

वहीं भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के बयान पर कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की आज कोई प्रासंगिकता नहीं रही है, अपने आप को सुर्खियों में लाने के लिए वे इस तरह की बातें कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट पर उन्होंने जिस तरह टिप्पणी की है। वह न्यायालय की अवमानना के तहत आता है, इसपर स्वतः संज्ञान लेते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

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क्या है पूरा मामला

बता दें कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय शासी निकाय की बैठक में मौलाना महमूद मदनी ने कहा था कि ‘मुर्दा कौम’ मुश्किलों में नहीं पड़ते। वे समर्पण कर देते हैं। उनसे वंदे मातरम पढ़ने को कहा जाएगा और वे तुरंत ऐसा करना शुरू कर देंगे। यही ‘मुर्दा कौम’ की पहचान है। अगर यह ‘ज़िंदा कौम’ है, तो हौसला बढ़ाना होगा और हालात का डटकर सामना करना होगा।

मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि बाबरी मस्जिद और तलाक के जुड़े मामले में प्रभाव आम है। अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही है। इबादतगाह कानून को नजरअंदाज करके ज्ञानवापी और मथुरा का मामला कोर्ट में सुना गया। सुप्रीम कोर्ट उस वक्त ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है जब तक संविधान की पाबंदी करे और अगर ऐसा ना करे तो सुप्रीम कहलाने का हक नहीं है।