मिर्जापुर. प्रदेश के मुखिया का जीरो टॉलरेंस पर पूरा जोर देते हैं और बेहतर कानून व्यवस्था होने का दावा भी करते हैं. असल में सारे दावे झूठे और खोखले साबित हो रहे हैं. बीते महीने 17 जनवरी को मिर्जापुर के चुनार थाना क्षेत्र में नाबालिग से हुई गैंगरेप की घटना में अब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल सका है. जीरो टॉलरेंस वाले प्रदेश की स्थिति ऐसी है कि रेप पीड़िता और उसकी मां अब भी न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है. जिसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है.
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कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “बेटी बचाओ” का ढोंग और दबंगों को संरक्षण. मिर्जापुर की यह घटना भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘महिला सुरक्षा’ के दावों की कलई खोल रही है, जहां एक महीने से कक्षा 9 की छात्रा न्याय की भीख मांग रही है. सत्ता के संरक्षण में पल रहे रसूखदार नेताओं के दबाव में पुलिस ने न सिर्फ आरोपियों के नाम हटाए, बल्कि पीड़िता को परीक्षा देने से रोककर उसके भविष्य पर भी वार किया है.
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आगे कांग्रेस ने कहा, शर्मनाक है कि अपनी ही बिरादरी के नेताओं और शिक्षकों द्वारा समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, जो यह साबित करता है कि प्रदेश में न्याय व्यवस्था अब अपराधियों के कदमों में नतमस्तक है. क्या यही है आपका वह ‘रामराज्य’ जहाँ बेटियों की चीख सत्ता के गलियारों में गुम हो जाती है और अपराधी खुलेआम घूमते हैं.
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