नई दिल्ली. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में जारी अवैध रेत खनन के प्रति चिंता जाहिर की है. एनजीटी ने वहां के जिलाधिकारी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग में शामिल होने का निर्देश दिया है.
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली एनजीटी पीठ ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया. उन्होंने बांदा के पुलिस अधीक्षक को इस मामले में एक माह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया. यह मामला बांदा जिले की केन नदी में रेत के अवैध उत्खनन से जुड़ा है. हैदर खान नामक एक व्यक्ति ने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि आरएसआई स्टोन वर्ल्ड लिमिटेड नामक कंपनी पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए रेत के अवैध उत्खनन में संलिप्त है और वह राज्य के प्रदूषण बोर्ड से मंजूरी मिले बिना खनन में जुटी है.
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एनजीटी ने जब मामले में दखल दिया तब राज्य प्रदूषण बोर्ड ने 22 सितंबर 2020 को कंपनी को नियमों का उल्लंघन का दोषी ठहराया. बोर्ड ने पाया कि उक्त कंपनी अनुमति प्राप्त तीन मीटर की गहराई के बजाय छह मीटर की गहराई तक खनन कर रही है. वह साथ ही पोकलैंड मशीन, लिफ्टर मशीन आदि का इस्तेमाल कर रही है. इसके बाद बांदा के जिलाधिकारी ने कंपनी का लीज रद्द कर दिया और परियोजना को ब्लैक लिस्ट कर दिया. उन्होंने कंपनी पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए 1.43 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया.
एनजीटी ने पाया कि जुर्माने की राशि कंपनी से अब तक नहीं वसूली गयी है. एनजीटी ने कहा कि इस बारे में न ही कंपनी ने और न ही राज्य प्रदूषण बोर्ड ने कोई जवाब दिया. बांदा जिलाधिकारी ने हालांकि यह जवाब दिया कि जुर्माने की राशि उनके द्वारा नहीं वसूली जा सकती है. मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होनी है.