प्रयागराज. कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज के रूप में शपथ ले ली है. केंद्र सरकार ने बीते सप्ताह जस्टिस यशवंत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर उनका नाम सातवें नंबर पर अपलोड किया गया. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध के बाद भी उनकी नियुक्ति की गई है.
इसे भी पढ़ें- किसान विरोधी है BJP! योगी सरकार की ‘तानाशाही’, मोदी की रैली के लिए खड़ी फसल पर चलवा दी JCB, भाजपा राज में अन्नदाताओं के साथ ये कैसा अन्याय?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की थी. CJI संजीव खन्ना की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनको फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का फैसला किया था. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने भारी मात्रा में कैश बरामद होने पर चिंता जाहिर की थी. कॉलेजियम के सदस्यों का मानना ये भी है कि अगर जस्टिस यशवंत वर्मा का सिर्फ तबादला किया गया तो न्यायपालिका की छवि पर बुरा असर पड़ेगा. कॉलेजियम के सदस्यों का कहना ये भी है कि जस्टिस यशवंत वर्मा से इस्तीफा मांगना चाहिए. इस्तीफा न देने पर उनके खिलाफ संसद में महाभियोग की प्रकिया शुरू करना चाहिए.
इसे भी पढ़ें- योगी सरकार का ‘निकम्मा सिस्टम’! खुद को जिंदा साबित करने वृद्धा 26 साल तक काटते रही दफ्तरों के चक्कर, हुई मौत, क्या यही होगा सुशासन सरकार में?
दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी थी. जिसके बाद उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया था. आग बुझाने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के बंगले में पुलिस और दमकल कर्मियों को भारी मात्रा में कैश मिला था. जिस वक्त आग लगी तब जस्टिस वर्मा शहर में नहीं थे.
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें