मोहम्मद आलम, महाराजगंज। जनपद के निचलौल स्थित मदरसा अरबिया अजीजिया मजहरूल उलूम में प्रबंध समिति को लेकर चला आ रहा विवाद वर्ष 2019–20 से लगातार गहराता जा रहा है। यह विवाद तत्कालीन प्रबंधक महमूदुल्लाह और आबिद अली के बीच शुरू हुआ था, जो समय के साथ कानूनी और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया।
तीन वर्ष में प्रबंध समिति का चुनाव अनिवार्य
आरोप है कि इसी विवाद के दौरान आबिद अली ने मदरसे के बायलॉज के पेज संख्या 4, पैरा संख्या 11(सी) का हवाला देते हुए यह दावा किया कि प्रत्येक तीन वर्ष में प्रबंध समिति का चुनाव अनिवार्य है। इसी आधार पर उन्होंने 7 अक्टूबर 2021 को अपना चुनाव कराकर सहायक रजिस्ट्रार, चिट्स फंड एवं सोसाइटी कार्यालय, गोरखपुर में कमेटी की सूची दाखिल कर दी। इस सूची को लेकर सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम की धारा 25(1) के अंतर्गत एसडीएम न्यायालय, निचलौल में वाद दर्ज किया गया।
आबिद अली के चुनाव को वैध ठहराया
दिनांक 24 अगस्त 2023 को एसडीएम निचलौल द्वारा आबिद अली के चुनाव को वैध ठहराया गया। इसके बाद आबिद अली ने वर्ष 1979 में बने मदरसे के पुराने बायलॉज का हवाला देते हुए स्वयं को प्रबंधक और अपने पुत्र जमशेर को अध्यक्ष बताते हुए 27 सितंबर 2023 को वर्ष 2024–25 के लिए 20 सदस्यीय प्रबंध समिति की सूची पंजीकृत करा दी। जबकि मदरसे के बायलॉज के पेज संख्या 7, बिंदु संख्या 28 में कार्यकारिणी समिति में अधिकतम 15 सदस्यों का ही स्पष्ट प्रावधान है। वहीं पेज संख्या 6 के पैरा संख्या 23 में एक सदर/अध्यक्ष और दो नायब सदर/उपाध्यक्ष होने का उल्लेख है, लेकिन आबिद अली द्वारा पंजीकृत कराई गई सूची में केवल एक ही नायब सदर दर्शाया गया है।
यह स्थगन आदेश 30 मई 2024 तक प्रभावी रहा
इसी बीच महमूदुल्लाह ने एसडीएम के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका संख्या 43243/2023 और30542/2023 दाखिल की, जिस पर हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर 2023 को एसडीएम के आदेश और पंजीकृत सूची पर स्थगन आदेश जारी कर दिया। यह स्थगन आदेश 30 मई 2024 तक प्रभावी रहा। ऐसे में यह गंभीर प्रश्न उठता है कि अप्रैल 2024 में आबिद अली ने किस अधिकार से वर्ष 2024–25 की सूची पंजीकरण हेतु दाखिल की। हालांकि मुकदमे के दौरान महमूदुल्लाह की तबीयत खराब होने के कारण आबिद अली पुनः प्रबंधक के रूप में कार्य करने लगे।
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प्रबंधक बनते ही आबिद अली पर ताबड़तोड़ अनियमित नियुक्तियां करने के आरोप भी लगे। आरोप है कि 22 जून 2024 को पांच नई नियुक्तियां की गईं, जिनमें कमेटी सदस्य मुस्तफा के पुत्र बदरुल कादरी की नियुक्ति भी शामिल है, जो मदरसा नियमावली 2016 के भाग-3, नियम-8 के विपरीत बताई जा रही है। इन नियुक्तियों को लेकर धन उगाही के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।इसके अतिरिक्त फाउंडर कमेटी की सूची के विपरीत अपने करीबी शिक्षक खालिद अली को नाजिम-ए-तालीमात नियुक्त कर दिया गया, जबकि फाउंडर कमेटी की सूची के अनुसार यह पद केवल कार्यकारिणी समिति के सदस्य को ही दिया जा सकता है।
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बताया जा रहा है कि इन नियुक्तियों के समय 20 सदस्यीय पुरानी प्रबंध समिति की वार्षिक अवधि समाप्त हो चुकी थी, जिसे 26 जून 2024 को पुनः पंजीकृत कराया गया। इसके बाद 10 अक्टूबर 2024 को साधारण सभा एवं कार्यकारिणी समिति के चुनाव के लिए आबिद अली द्वारा अपनी सूची सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय, गोरखपुर में प्रस्तुत की गई।जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कार्यकारिणी समिति से पांच सदस्यों को बिना किसी नोटिस अथवा वैधानिक प्रक्रिया के हटा दिया गया। इस पर सहायक रजिस्ट्रार ने पत्र जारी कर सभी पांच सदस्यों को 20 नवंबर 2024 को आपत्ति सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया। सदस्यों ने स्पष्ट किया कि उन्हें बिना सूचना और प्रक्रिया के समिति से बाहर किया गया।
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इसके बाद सहायक रजिस्ट्रार ने दोनों पक्षों को साक्ष्यों सहित 22 नवंबर 2024 और 13 दिसंबर 2024 को उपस्थित होने का निर्देश दिया, जिससे प्रबंध समिति और चुनाव प्रक्रिया दोनों ही विवादित होकर लंबित हो गईं। इसी बीच 27 दिसंबर 2024 को नूरुलएन नामक व्यक्ति द्वारा स्वयं को प्रबंधक बताते हुए 22 दिसंबर 2024, 24 नवंबर 2024 एवं 24 दिसंबर 2024 को चुनाव कराए जाने का दावा करते हुए वर्ष 2024–25 की कार्यकारिणी एवं साधारण सभा की सूची पंजीकृत कराने का अनुरोध किया गया, जिससे विवाद और अधिक गहरा गया।
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विवाद के चलते सदस्य शौकत अली ने पुनः एसडीएम न्यायालय, निचलौल में धारा 25(1) के अंतर्गत वाद दाखिल किया। इस पर एसडीएम निचलौल ने पत्र संख्या 203, दिनांक 20 फरवरी 2025 के माध्यम से संस्था की मूल पत्रावली तलब की, जिसे सहायक रजिस्ट्रार द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया।आरोप है कि इसी दौरान आबिद अली ने कमेटी सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए नौकरी देने का आश्वासन ई-स्टांप पर लिखित रूप में दिया तथा 25 फरवरी 2025 को एक कथित फर्जी बैठक दर्शाकर आदर्श प्रशासन योजना का लाभ लेने के लिए तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को गुमराह किया, जबकि उस समय मदरसे की प्रबंध समिति स्वयं विवादित थी और मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मदरसे के संविधान एवं बायलॉज के अनुसार कार्यकारिणी समिति में अधिकतम 15 सदस्य ही हो सकते हैं, जिनमें एक सदर और दो नायब सदर का होना अनिवार्य है। इसके बावजूद आबिद अली द्वारा पंजीकृत कराई गई सूची में 20 सदस्य दर्शाए गए हैं तथा पदों की संरचना भी नियमों के विपरीत पाई गई है। इन तमाम घटनाक्रमों ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मदरसा प्रबंधन द्वारा बार-बार संविधान, बायलॉज और सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम की अनदेखी कर प्रशासन को गुमराह किया गया। अब इस पूरे मामले में एसडीएम न्यायालय निचलौल के निर्णय और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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