प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न और पोक्सो एक्ट के तहत अग्रिम जमानत दे दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेच ने दोपहर 3:45 बजे यह अहम फैसला सुनाया।
मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे दोनो पक्ष
जस्टिस सिन्हा की बेंच ने बचाव पक्ष की दलीलों को मानते हुए दोनों की जमानत याचिका मंजूर कर दी। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। साथ यह भी कहा कि दोनों पक्ष मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे और इंटरव्यू नहीं देंगे। अगर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो दूसरा पक्ष जमानत कैंसिलेशन अर्जी दे सकता सकता है।
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27 फरवरी को हुई थी सुनवाई
बता दें कि इस मामले की पिछली सुनवाई 27 फरवरी को हुई थी। उस दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगी गई थी। इस दौरान शंकराचार्य के वकील ने कहा था कि यह केस एक धर्मगुरु का है, न कि किसी अपराधी का। पूरा मामला साजिश का है। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की हिस्ट्रीशीट भी बताई। वहीं दूसरे पक्ष के वकील का कहना था कि अविमुक्तेश्वरानंद अगर बाहर रहेंगे तो केस को प्रभावित कर सकते हैं। उन्हें पहले निचली अदालत में जाना चाहिए था।
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गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज की विशेष पाक्सो कोर्ट में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण का आरोप लगा है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने ये शिकायत शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ की थी। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर झूंसी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। साथ ही 13 फरवरी को दोनों बच्चों का बयान भी दर्ज किया गया। 26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट में कुकर्म की पुष्टि हुई। इस दौरान एक पीड़ित बटुक ने मीडिया को बताया कि मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया।
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