सीतापुर। पूर्व मंत्री आजम खान सीतापुर जेल में बंद हैं,हालांकि संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही आजम को कोर्ट से राहत मिल जाएगी और बाहर आएंगे।बीते माह 25 फरवरी को उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम भी हरदोई जेल से बाहर आए थे। अब्दुल्ला को कोर्ट से जमानत मिली थी। अब्दुल्ला 17 महीने जेल में रहने के बाद रिहा हुए थे। अब्दुल्ला आजम ने शनिवार को सीतापुर जेल में बंद पिता आजम खान से ईद से पहले मुलाकात की।आज़म खान से अब्दुल्ला लगभग 19 महीने बाद मिले।अब्दुल्ला के साथ रामपुर के पूर्व विधायक यूसुफ मलिक और सपा नेता मोहम्मद सलीम भी मौजूद थे।

आजम खान से मिले अब्दुल्ला

अब्दुल्ला शनिवार दोपहर 12 बजे सीतापुर जेल पहुंचे। अब्दुल्ला ने विजिटर रजिस्टर में हस्ताक्षर किया,इसके बाद अब्दुल्ला जेल में प्रवेश किया। 1 महीने पहले पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अदीब ने आजम खान से मुलाकात की थी। जेल में 1 घंटे 23 मिनट तक बातचीत हुई थी। 25 फरवरी को अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल से रिहा हुए थे। अब्दुल्ला दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 16 महीने से जेल में बंद थे।अक्टूबर 2023 में कोर्ट ने अब्दुल्ला को 7 साल की सजा सुनाई थी,इसके बाद अब्दुल्ला को हरदोई जेल भेज दिया गया था। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम आजम खान 19 महीने से सीतापुर की जेल में बंद हैं।आजम पर जमीन कब्जा करना,बकरी और किताब चोरी तक के 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।इसमें से 9 मामलों में फैसला भी आ चुका है,जिसमें 6 में सजा सुनाई गई है और 3 में बरी हो चुके हैं।

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आजम के अधिकतर मामले कोर्ट में विचाराधीन

आजम पर 2019 में ताबड़तोड़ 84 मामले दर्ज हुए थे। इसमें से अधिकतर मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। 3 मामलों में आजम खान को सजा भी हो चुकी है। 15 जुलाई 2023 को आजम खान को हेट स्पीच मामले में रामपुर की कोर्ट ने 2 साल की सजा सुनाई थी। 31 जनवरी 2024 को डूंगरपुर के एक केस में आजम खान को 7 साल की कैद और 5 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई। यह मामला रूबी पत्नी करामत अली की तरफ से दर्ज कराया गया था। 30 मई 2024 को डूंगरपुर के एक केस में आजम खान को 10 साल की कैद और 14 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई। यह अबरार पुत्र नन्हें खां ने दर्ज कराया था।

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रामपुर से 10 बार के विधायक

आजम खान रामपुर से 10 बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। 1980 में रामपुर के नवाब से मुकाबला करने के लिए आजम ने बीड़ी,कपड़ा मजदूरों और रिक्शा चालकों की यूनियन बनाई।रामपुर जो एक जमाने में नवाब परिवार के वर्चस्व के लिए जाना जाता था,वहां आजम ने अपनी अलग पहचान बनाई।आजम खान मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे हैं।सपा पार्टी बनने से पहले आजम खान ने 1980 में पहली बार जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता था।इसके बाद लोकदल और फिर सपा के टिकट पर चुनाव जीतते रहे।अमर सिंह से विवाद के बाद आजम खान ने 2009 में सपा से इस्तीफा दे दिया था। लगभग डेढ़ साल सपा से बाहर रहने के बाद दिसंबर 2010 में दोबारा आजम सपा में शामिल हो गए। 2012 में अखिलेश यादव की सरकार बनी तो आजम खान को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और नगर विकास जैसा अहम विभाग दिया गया।

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आजम खान का विवादों से गहरा नाता

आजम खान का विवादों से गहरा नाता रहा है।आजम पर सदन में महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने से लेकर अधिकारियों के साथ गलत व्यवहार करने और चुनाव के दौरान आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगता रहा है। 2019 के चुनाव में चुनाव आयोग ने आजम पर 2 बार प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाया था।हालांकि चुनाव में आजम को जीत मिली थी,लेकिन एक आपराधिक मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा होने के कारण आजम की सदस्यता चली गई थी।रामपुर में उपचुनाव हुआ और भाजपा के घनश्याम ने यहां जीत दर्ज की। सपा शासनकाल में आजम को मिनी सीएम भी कहा जाता था। आजम खान के समर्थक अपने नेता के ईद के बाद जेल से बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसको लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है,लेकिन सूत्रों की माने तो आजम खान पर यूपी सरकार मेहरबान हो रही है और जल्द आजम खान बड़ा ऐलान कर सकते हैं।

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सूत्रों की माने तो आजम खान और यूपी सरकार के बीच अब रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। यही वजह है की पिछले दो-तीन महीनों के दौरान आजम खान और उनके परिवार को कई मुकदमों में राहत मिल चुकी है,जबकि बीते लोकसभा चुनाव के दौरान सपा से आजम खान की नाराजगी किसी से छिपी नहीं है। सूत्रों की माने तो आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी मामले में भी यूपी सरकार लंबे समय से खामोश है और कोई एक्शन नहीं लिया गया है।