बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां बेटे को मंत्री बनाए जाने के बाद से राष्ट्रीय लोक मोर्चा में मचे घमासान को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने आज रविवार को एक बड़ा फैसला लिया है। कुशवाहा ने पार्टी में उठ रहे विरोध और नेताओं के इस्तीफे के बाद तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्रदेश इकाई समेत सभी प्रकोष्ठों और जिला इकाइयों को भंग कर दिया है।
कोर कमेटी की बैठक में लिया फैसला
पटना में आज रविवार को आयोजित कोर कमेटी की बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता रालोमो प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने की। उन्होंने पार्टी में अनुशासन बनाए रखने और संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया।
पांच सदस्यीय संचानल समिति का गठन

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक ने यह जानकारी देते हुए बताया की, पार्टी को संचालित करने के लिए तत्काल पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है। समिति का संयोजक मदन चौधरी को बनाया गया है। सुभाष चंद्रवंशी, प्रशांत पंकज, हिमांशु पटेल और आर. के. सिन्हा समिति के सदस्य बनाये गए हैं।
बता दें कि बैठक में मुख्य रूप से विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह, सहित रामपुकार सिन्हा, जंगबहादुर सिंह, अंगद कुशवाहा, ठाकुर धर्मेन्द्र सिंह, ब्रजेन्द्र पप्पू, चन्दन बागची, सुकुल राम और स्मृति कुमुद शामिल थी।
डैमेज कंट्रोल करने के लिए बड़ा फैसला
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दिपक कुमार को मंत्री बनाए जाने के बाद से ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में भारी नाराजगी थी। दबी जुबान में विरोध के सुर उठ रहे थे, जो धीरे-धीरे बगावत में बदलने लगे थे। कहा जा रहा है कि इसी डैमेज को कंट्रोल कुशवाहा ने यह बड़ा फैसला लिया है।
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