अमेरिका और इजरायल ने ईरान में स्थित स्टील प्लांट और अन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं. इस अटैक के कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ईरान इस कार्रवाई का भारी जवाब देगा. उन्होंने कहा कि इजरायल ने ईरान के दो बड़े स्टील कारखानों, एक बिजली प्लांट और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है. अराघची ने डोनाल्ड ट्रंप की भी आलोचना की और कहा कि ये हमले उस समय हुए जब कूटनीतिक बातचीत के लिए समय बढ़ाया गया था. उनके अनुसार, यह हमला शांति प्रयासों के खिलाफ है.

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर स्टील प्लांट और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

इजरायल का कहना है कि ये ठिकाने परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी सामग्री तैयार करने में इस्तेमाल हो सकते थे. इसी वजह से इन्हें निशाना बनाया गया. ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, इस्फ़हान और खुज़स्तान में स्थित स्टील कंपनियों पर भी हमले हुए हैं. इस्फहान के मोबारेकेह स्टील प्लांट में एक बिजली सुविधा पर हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए.

अराघची ने डोनाल्ड ट्रंप की भी आलोचना की और कहा कि ये हमले उस समय हुए जब कूटनीतिक बातचीत के लिए समय बढ़ाया गया था. उनके अनुसार, यह हमला शांति प्रयासों के खिलाफ है. IDF ने भी इन हमलों की पुष्टि की है. उसने बताया कि ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत ईरान के Arak Heavy Water Plant और Yazd में यूरेनियम से जुड़ी एक ठिकाने को निशाना बनाया गया.

इजरायली हमले में खुजेस्तान में भी एक स्टील कंपनी को नुकसान पहुंचा है और वहां 16 कर्मचारी घायल हुए हैं. इसके अलावा फिरोजाबाद की एक खदान, खैराबाद की एक सीमेंट फैक्ट्री और मशहद एयरपोर्ट के गोदाम को भी निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में जंग बढ़ गया है और शांति वार्ता की संभावना पर भी असर पड़ सकता है.

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