US Air Strike On Iran Hormuz Missile Sites: इजराइल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध अब अमेरिका वर्सेज ईरान (Iran-US War) का हो गया है। ईरान की तरफ सं बंद किए गए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री रास्ता) को खुलवाने के लिए अमेरिका ने अपनी ताकत झोंक दी है। सहयोगियों से साथ नहीं मिलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अकेले दम पर ईरान को हराने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खुलवाने का ऐलान किया है। ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल अड्डों बड़ा पर हमला बोला है। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5000 पाउंड वाले बंकर बस्टर बम (Bunker Buster Bombs) से हमला किया है।

अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय इलाकों में मिसाइल ठिकानों पर भारी बमों से हमला किया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन ठिकानों पर तैनात ईरानी एंटी-शिप मिसाइल इस पानी के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं, इसलिए इन पर कार्रवाई की गई है। इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुद ‘X’ (ट्विटर) पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के तट पर बने मजबूत मिसाइल ठिकानों को इन भारी-भरकम बमों से तबाह कर दिया गया है। असल में, ये वही ठिकाने थे जहां से ईरान की एंटी-शिप मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थीं। बता दें कि ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। इस वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं और समुद्री रास्तों पर डर का माहौल था।

लड़ाई में ट्रंप को अपनों से साथ छोड़ा

इधर ट्रंप इस लड़ाई में खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंने नाटो (NATO) समेत अपने पुराने साथी देशों से मदद मांगी थी, लेकिन ज्यादातर ने इस जंग में साथ आने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ट्रंप इस बात से काफी नाराज हुए हैं कि अमेरिका ने सालों तक नाटो की मदद की, लेकिन जब आज जरूरत पड़ी, तो कोई छोटा जहाज (माइनस्वीपर) भेजने को भी तैयार नहीं है।

बंकर बस्टर बम क्या होते हैं?

ये ऐसे खास बम होते हैं जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों को निशाना बनाते हैं। अमेरिकी वायुसेना ने 2021 में ऐसे बम का सफल परीक्षण किया था, जिसे GBU-72/B कहा जाता है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के छिपे सैन्य ठिकानों को खत्म करने के लिए किया जाता है। वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी के अनुसार, यह 30,000 पाउंड कैटेगरी का हथियार है जिसमें 5,000 पाउंड का वारहेड लगा है।

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