US-Israel and Iran War: ईरान युद्ध के बीच बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को बड़ा झटका दिया है। इजराइल ने साफ कहा है कि इजराइली सेना ग्राउंड ऑपरेशन के लिए ईरान नहीं जाएगी। इजरायल ने कहा है कि वह अपने हवाई और समुद्री अभियान को जारी रखेगा, लेकिन ईरान में जमीनी कार्रवाई नहीं करेगा। इजराइल फिलहाल दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान पर ध्यान केंद्रित करने के कारण लिया है। इजराइल के इस कदम को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस निर्णय से अमेरिका पर जमीन अभियान का पूरा बोझ पड़ सकता है।
इजरायल के चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है तो उसे अकेले ही इस मिशन को पूरा करना होगा। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वह अमेरिका का तकनीकी सहयोग और खुफिया जानकारी के जरिए मदद करता है या नहीं।
इजरायल ने युद्ध को लेकर अपना रुख ऐसे समय में साफ किया है, जब वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पेंटागन ईरान में जमीनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है.य़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान और मिडिल ईस्ट में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी इस संभावना को और बल दे रहे हैं।
50 हजार सैनिकों ने ईरान को चारों और से घेरा
बता दें कि अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करने की तैयारी शुरू कर दी है। 50 हजार अमेरिकी सेना (us Army) ने ईरान को चारों ओर से घर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की तादाद 50 हजार के पार पहुंच गई है, जो आम दिनों के मुकाबले करीब 10 हजार ज्यादा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2500 मरीन और 2500 नाविकों के नए जत्थों के दाखिल होने से इलाके में अमेरिकी घेराबंदी मजबूत हुई है। किसी भी वक्त कुछ भी हो सकता है। अमेरिकी सेना के 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के 2000 पैराट्रूपर्स भी ईरान से हमला करने लायक दूरी के अंदर तैनात किए गए हैं। यह सैन्य जमावड़ा होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने और ईरानी हमलों का जवाब देने के लिए किया गया है। हालांकि, मिलिट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान जैसे बड़े देश पर कब्जा करने के लिए 50 हजार सैनिकों की तादाद बहुत कम है। फिलहाल अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप सहित 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बमबारी कर चुके हैं।
ट्रंप क्या लेंगे फैसला?
अमेरिकी राष्ट्रपति इस ऑपरेशन को शुरू करेंगे या नहीं, यह भी तय नहीं हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो यूएस अगर यह सैन्य अभियान शुरू करता है तो यह जोखिम भरा साबित हो सकता है। अमेरिकी सेना को कई दिनों या इससे ज्यादा समय तक ईरान में रहकर इसे अंजाम देना पड़ सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल को अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप अमेरिकी आर्मी को होने वाले रिस्क को लेकर विचार कर रहे हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ती है तो वह इसके लिए तैयार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन मिडिल ईस्ट में 10000 तक अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को घोषणा की कि 2500 मरीन सहित 3500 से ज्यादा सैनिक मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं।
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