US Markets Fell Details: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पारस्परिक टैरिफ की घोषणा के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में दो दिनों तक भारी गिरावट दर्ज की गई. डाउ जोंस इंडेक्स करीब 2,231.07 अंक यानी 5.50% गिरकर 38,314 पर बंद हुआ. एक दिन पहले भी इसमें 3.98% की गिरावट आई थी. यानी दो दिनों में डाउ जोंस में 9% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है.

वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स में 322.44 अंक यानी 5.97% की गिरावट आई. यह 5,074 पर आ गया. नैस्डैक कंपोजिट में 962.82 अंक यानी 5.82% की गिरावट आई और यह 15,587 पर बंद हुआ. एप्पल, बोइंग, इंटेल और डाउ इंक जैसी कंपनियों के शेयरों में 12% तक की गिरावट आई.

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दो दिन में मार्केट कैप में करीब 5 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई (US Markets Fell Details)

इस गिरावट के कारण अमेरिकी शेयर बाजार के मार्केट कैप में 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई है. 3 अप्रैल को S&P 500 इंडेक्स का मार्केट कैप 45.388 ट्रिलियन डॉलर था, जो 4 अप्रैल को घटकर करीब 42.678 ट्रिलियन डॉलर रह गया है. वहीं, 2 अप्रैल को मार्केट कैप 47.681 ट्रिलियन डॉलर था. यानी दो दिन में मार्केट कैप में करीब 5 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई है.

अमेरिकी बाजार में गिरावट के 4 कारण (US Markets Fell Details)

  1. चीन ने भी अमेरिका पर लगाया 34% टैरिफ: चीन ने शुक्रवार को अमेरिका पर 34% जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. नया टैरिफ 10 अप्रैल से लागू होगा. दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनियाभर में टिट फॉर टैट टैरिफ लगाया था, जिसमें चीन पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था. अब चीन ने भी अमेरिका पर यही टैरिफ लगाया है.
  2. कॉर्पोरेट मुनाफे में कमी का डर: अमेरिका ने सभी आयातित वस्तुओं पर 10% न्यूनतम टैरिफ और कुछ देशों पर इससे भी अधिक टैरिफ (जैसे चीन पर 34%, वियतनाम पर 46%) की घोषणा की है. इससे वहां से आने वाले सामानों की कीमत बढ़ जाएगी. इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. मुनाफे में कमी के डर से निवेशकों ने शेयर बेचना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में गिरावट आई है.
  3. वैश्विक व्यापार युद्ध का डर: अमेरिका द्वारा टैरिफ की घोषणा के बाद, अन्य देश भी जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि भारत पर 26% टैरिफ लगाया जाता है, तो भारत भी अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा सकता है. इससे वैश्विक व्यापार में व्यवधान पैदा हो सकता है, जिसका असर आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा. इस अनिश्चितता के कारण निवेशक घबरा गए हैं और उन्होंने शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है.
  4. आर्थिक मंदी की चिंता: टैरिफ के कारण यदि सामान महंगा हो जाता है, तो लोग कम खरीदेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था धीमी हो सकती है. साथ ही, कम मांग (यूएस क्रूड 69.63 डॉलर प्रति बैरल) के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है. यह कमजोर आर्थिक गतिविधि का संकेत है. इससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और बाजार में गिरावट तेज हो गई है.

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