देहरादून. ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विवाद को लेकर देशभर में चर्चाओं का बाजार गर्म है. संत समाज, सनातन को मानने वाले और श्रद्धालु सभी इस निंदनीय घटना के बाद से शंकराचार्य के पक्ष में आ गए हैं. कुछ राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों और सोशल मीडिया की दुनिया को छोड़ दें तो सभी शंकराचार्य और बटुकों के साथ किए गए दुर्व्यवहार से शासन-प्रशासन से नाराज हैं. वहीं अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उत्तराखंड के पंडे-पुजारियों का भी साथ मिल गया है.

उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के पंडे पुजारी और पदाधिकारी शंकराचार्य के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं. सभी ने इस प्रकरण को लेकर बयान जारी किया है. उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित पंचायत के अध्यक्ष का कहना है कि ‘इस तरह से सनातन धर्म पर कुठाराघात को नहीं सहा जाएगा. सनातन धर्म के हमारे प्रमुख चार शंकराचार्यों के अगर धार्मिक महत्व पर सम्मान नहीं करेंगे, उन्हें उनकी परंपराओं को निभाने नहीं देंगे, तो हम किस सनातन की बात कर रहे हैं. जो लोग आज इस बात को लेकर वोट मांगते हैं कि हिंदू खतरे में है, वह खुद सनातन को आज इस तरह से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं.’

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बदरीश पंडा पंचायत ने की घोर निंदा

बदरीश पंडा समिति बद्रीनाथ के अध्यक्ष ने कहा कि ‘परम पूज्य ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य महाराज के साथ जो यह घटना हुई है, उसकी श्री बदरीश पंडा पंचायत घोर निंदा करती है. साथ ही शासन प्रशासन और सरकार के माध्यम से जिस तरह से उनके शंकराचार्य होने की प्रमाणिकता मांगी जा रही है और उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है वो गलत है. शासन प्रशासन का काम घाटों पर व्यवस्था बनाने का है, ना कि शंकराचार्य की प्रमाणिकता पूछने का. शासन प्रशासन अपना काम ठीक से करे. व्यवस्था करें और परंपराओं को निभाने में अपनी भूमिका निभाएं ना की परंपराओं को तोड़ने में.’

परंपरा, धार्मिक आस्था और शास्त्रों पर गहरी चोट

ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित समिति के अध्यक्ष का कहना है कि ‘इस घटना के पीछे जो भी लोग हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. पूरे देशवासियों से हमारा आह्वान है कि वह हमारी सनातन धर्म की लोक परंपराओं का नेतृत्व करने वाले ध्वजवाहक के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दें. प्रयागराज में घटी यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं है. यह हमारी परंपरा, धार्मिक आस्था और शास्त्रों पर गहरी चोट है.’

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धर्म की रीढ़ है शंकराचार्य, उनसे ही सनातन का संचालन

यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता ने कहा है कि ‘ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य महाराज के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ है, वह बेहद निंदनीय है. जो व्यक्ति हमारे धर्म के ध्वजवाहक हैं, खुद शंकराचार्य हैं और जिन्हें पीठाधीश्वर की उपाधि प्राप्त है, उन्हें मौनी अमावस्या के दिन अपनी धर्म नीति के अनुसार स्नान करने से रोका जाता है. उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है. हम इस घटना को बेहद निंदनीय मानते हैं और इससे हमें बेहद पीड़ा हुई है. वह व्यक्ति सनातन धर्मावलंबी है और हमारे धर्म की रीढ़ हैं. उनसे ही हमारे सनातन धर्म का संचालन होता है तो उनके मान सम्मान को ठेस पहुंचाने का अर्थ है, हर एक सनातनी को ठेस पहुंचाना जो कि बेहद दुखदाई है.’