Venezuela Oil: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स (Cilia Flores) को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को बंधक बनाकर अमेरिकी सेना यूएस ले गई है। अमेरिका ने इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम दिया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के भाग्य का फैसला अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। बेसक डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अमेरिका के खिलाफ षड्यंत्र और मादक पदार्थों की सप्लाई का आरोप लगाकर वेनेजुएला पर हमला किया है। हालांकि इसके पीछे असली खेल ‘तेल’ का है। तेल का खेल किसी भी देश की अर्थव्यस्था को फर्स से अर्श तक पहुंचा सकती है। साथ ही अर्श से फर्स पर पहुंचा सकती है। तभी तो अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में हमला और ऑयल सेक्टर में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बयानों ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भी उथल-पुथल मचा दी है।

हम यहां बात करते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला वेनेजुएला कभी दुनिया का चौथा अमीर देश था। लोग शॉपिंग के लिए अमेरिका के मियामी जाते थे। ऐसा फिर क्या हुआ कि वेनेजुएला आज दाने-दाने को महताज हो गया है।

1950 का दशक में चमक रही थी वेनेजुएला की किस्मत

1950 के दशक में जब आधी दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के नुकसान से उबर रही थी, तब वेनेजुएला की किस्मत जमीन के नीचे से निकलने वाले काले सोने यानी तेल ने बदल दी थी। 1952 में वेनेजुएला दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बन चुका था। राजधानी कराकस की सड़कों पर उस समय लग्जरी कारें दौड़ती थीं और गगनचुंबी इमारतें खड़ी थीं। 1960 के दशक तक वेनेजुएला सिर्फ तेल बेचने वाला देश नहीं रहा। वेनेजुएला की ही पहल पर सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों ने हाथ मिलाया और ‘ओपेक’ की नींव रखी।

1960 की बगदाद बैठक में वेनेजुएला के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जुआन पाब्लो पेरेज अल्फोंजो ने किया था।

1970 के दशक में वेनेजुएला पर हुई पैसों की बारिश

1970 के दशक में जब पूरी दुनिया में तेल संकट आया और कीमतें आसमान छूने लगीं, तो वेनेजुएला के घरों में डॉलर की बारिश होने लगी। उस दौर के किस्से आज भी मशहूर हैं…लोग वीकेंड पर शॉपिंग करने के लिए सीधे मियामी उड़कर जाते थे। वेनेजुएला दुनिया के सबसे महंगे स्कॉच व्हिस्की और शैंपेन के सबसे बड़े खरीदार में से एक था। जनता को लगने लगा था कि अब मेहनत करने की जरूरत नहीं है। इसकी प्रति व्यक्ति आय स्पेन, ग्रीस और इजराइल जैसे विकसित देशों से भी कहीं ज्यादा थी। 1976 में सरकार ने तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया और सरकारी कंपनी PDVSA बनाई। यह दुनिया की सबसे मुनाफे वाली तेल कंपनियों में से एक थी।

निकोलस मादुरो के सत्ता में आने पर महंगाई ने पकड़ी रफ्तार

निकोलस मादुरो की सरकार बनने के बाद वेनेजुएला के बुरे दिन शुरू हो गए। 2018 के आते-आते यहां महंगाई की रफ्तार 1,30,000% के पार चली गई। वहां के लोग एक दर्जन अंडे खरीदने के लिए भी नोटों से भरा झोला ले जाने को मजबूर थे। नोट गिने नहीं जाते थे, बल्कि तराजू के एक पलड़े पर सामान और दूसरे पर नोटों की गड्डियां रखी जाती थीं। वेनेजुएला अपनी 80% जीडीपी गंवा चुका है। यानी, अगर 2012 में देश की अर्थव्यवस्था 100 रुपए की थी, तो आज वह सिर्फ 20 रुपए की बची है।

1990 के दशक के आखिर में जो देश रोजाना 35 लाख बैरल तेल निकालकर दुनिया पर राज करता था, वह आज 2026 की शुरुआत तक बमुश्किल 8 से 11 लाख बैरल पर सिमट गया है। सरकारी तेल कंपनी मेंटेनेंस के अभाव में सब कबाड़ हो गई। पेट्रोल विदेशों से मंगाया जा रहा है।

Oil Price में होने वाले बदलावों का अमेरिका पर क्या असर होगा?

एक्सपर्ट की मानें, तो ये अमेरिका के लिए फायदा, जबकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए झटका है। Venezuela Oil Reserve पर डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका द्वारा लगाए गए दांव के फायदे और नुकसान को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। अमेरिकी निवेशक और पर्शिंग स्क्वायर के सीईओ बिल एकमैन (Bill Ackman) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी राय रखी है और वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के प्रभावों को सीधे वैश्विक तेल की कीमतों (Global Crude Oil Price) और भू-राजनीतिक परिणामों से जोड़ा है।

एकमैन ने अपने X पोस्ट में लिखा, ‘वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को सत्ता से हटाने से तेल की कीमतें गिरेंगी, जो अमेरिका के लिए एक अच्छी खबर साबित होगी। अपनी पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि जहां ये US के लिए गुड न्यूज है। वहीं रूस के लिए बेहद बुरी और झटका देने वाली है। उन्होंने बताया कि रूस की अर्थव्यवस्था (Russian Economy) तेल की कीमतों में गिरावट के बाद कमजोर हो सकती है और इससे यूक्रेन में युद्ध के जल्द और यूक्रेन के लिए अधिक अनुकूल शर्तों पर समाप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी।

बायोकेमिस्ट क्रिस मार्टेंसन ने नुकसान की बात कही
हालांकि, बिल एकमैन के इस विचार पर अमेरिकी बायोकेमिस्ट क्रिस मार्टेंसन ने अलग बात कही और और चेतावनी दी है कि सस्ते तेल से America को नुकसान हो सकता है। उन्होंने तर्क देते हुए बताया कि शेल बेसिन पहले से ही इन कीमतों पर संघर्ष कर रहे हैं। कीमतों में और गिरावट आने से नुकसान होगा और यह अमेरिकी समृद्धि के लिए बुरा है। अमेरिकी शेल ऑयल का प्रमुख बेंचमार्क, WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट), फिलहाल में 57-60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। मार्टेंसन ने बताया कि अधिकांश नए शेल ड्रिलिंग तभी स्पष्ट रूप से फायदेमंद होते हैं, जब कीमतें काफी अधिक हों। उन्होंने बताया कि कई ऑयल प्रोड्यूशर्स का कहना है कि नई गतिविधियों को उचित ठहराने के लिए उन्हें लगभग 65 डॉलर से अधिक कीमतों की आवश्यकता है।

303 अरब बैरल का तेल भंडार
बता दें कि वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार (World Biggest Crude Oil Reserve) है, जिसका अनुमान लगभग 303 अरब बैरल है। मौजूदा कीमतों (लगभग 57 डॉलर प्रति बैरल) पर भी इस तेल भंडार का मूल्य लगभग 17.3 ट्रिलियन डॉलर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ऐलान करते हुए कहा है कि वाशिंगटन वेनेजुएला के तेल उद्योग में बहुत मजबूती से शामिल होगा, जो देश की ऊर्जा संपत्तियों के प्रति US Policy में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है।

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