VIDEO : एक सदी से अधिक पुराने मकान में ‘नाग’ साँपों का बसेरा, दीवार तोड़ी तो ‘कोबरा’ झुँड में निकलते गए !

रायपुर। शीर्षक पढ़कर जितनी हैरानी आप सबको हो रही है, अंदाज़ा लगाइए नाग साँपों के बीच रह रहा था उन्हें अपनी आँखों से यह देखकर कितना अचरज हुआ होगा. आम तौर यह बात सुनने और कभी-कभी देखने में मिलती है, कि जहरीले साँपों का बसेरा खंडहरनुमा जगहों पर, किसी पुराने पेड़ पर, कहीं मिट्टी के टीलों में होता है. लेकिन एक आवासीय घर में जहाँ परिवार वाले रहते हो, वहाँ दीवारों के बीच कोबरा का अपना पूरा परिवार वर्षों से रह रहा यह जानकर और देखकर यकीन नहीं होता, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी से 30 किलोमीटर दूर दुर्ग जिले के पाटन तहसील के भैंसबोड़-कुम्हली गाँव में यह अविश्वसीय और अदभूत् नज़ारा देखकर आपको यकीन तो करना होगा. 

मकान मालिक चिंताराम चंद्राकर ने अपने पुश्तैनी मकान की एक दीवार को तोड़ी तो वहाँ एक-एक कर साँप निकलने लगे. यह ख़बर बड़ी तेजी से गाँव में फैल गई. गाँव वालों की भीड़ चिंताराम के घर में जुट गई. गाँव से बाहर जब ख़बर निकली तो जानकारी नोवा नेचर सोसायटी तक पहुँची. नोवा नेचर के सदस्य अजय चौधरी और अविनाख कुमार चिंताराम के घर पहुँचे. यहाँ उन्होंने दीवारों के बीच एक-एककर साँपों को निकालना शुरू किया. नोवा नेचर के सदस्य भी इस बात हैरान थे, कि आखिर इतनी संख्या में यहाँ जहरीले नाग(कोबरा) कहाँ से आ गए. हमने इस बारे में नोवा नेचर के सदस्य मोहित से बात हुई उन्होंने बताया कि लगातार रेस्क्यू करने पर वहाँ तकरीबन साँप के 40 अंडे मिले. इससे यह बात समझ में आने लगी कि कोबरा में चूहों के बिल के जरिए दीवारों के बीच अपनी घुसपैठ कर लिया था. यहीं पर मादा नाग ने अंडे दी होगी और उसे रहने के लिए यह स्थान सुरक्षित लगा होगा. फिलहाल जितने भी नाग को हमने वहाँ से निकाला है उन्हें वन विभाग की मदद से जंगल में छोड़ दिए हैं.
 

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