VIDEO सोनाखान-1: वेदांता ने जिस गांव में किया था सोने के लिए सर्वे वहां की जमीनी हकीकत…जानिए भूपेश सरकार के निर्णय का क्या हुआ असर?

वैभव बेमेतरिहा। छत्तीसगढ़ न सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता से भरा पड़ा है बल्कि यहां की धरा में अपार खनिज संपदा भी है. लोहा, कोयला का भंडार तो यहां है ही साथ ही धान का कटोरा छत्तीसगढ़ में सोने की खान, सोनाखान भी है. वही सोनाखान जो छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद की धरा है,  वही सोनाखान जो शहादत की भूमि है, वहीं सोनाखान जो प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम की रणभूमि रही है, वही सोनाखान जिसे पूर्व सरकार ने बेच दिया था. वही सोनाखान जहां के लोग विस्थापित होने वाले थे, वही सोनाखान जहां 5 सौ हेक्टेयर जंगल तबाह होने जा रहा था, वही सोनाखान जिस पर डोली है कितनों की नियत. वही सोनाखान जिस पर नई सरकार ने लिया है एक बड़ा निर्णय. lalluram.com पर आपको बताने जा रहे हैं उस गांव की जमीनी हकीकत जहां के रहवासियों के बिना मर्जी वेदांता ने पूर्व सरकार की मदद से कर ली थी सोना निकालने की तैयारी. उस इलाके की जमीनी पड़ताल जहां किया गया था सोना के लिए सर्वे.

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ये शहीद वीरनारायण सिंह का इलाका सोनाखान है. स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीरनारायण का सोनाखान. इसी इलाके का ये गांव है बाघमाड़ा. वही बाघमाड़ा जहां वेदांता ने सोना निकालने का सर्वें किया. तस्वीर में जिस पत्थर को जंगल में गड़ा दिख रहा है गांव वाले बताते हैं कि ये पत्थर वेदांता के लोगों ने यहां गड़ाए थे. इसी तरह के पत्थर इस इलाके में कई जगहों पर गड़ाए गए हैं.  यहां अक्सर कंपनी के लोग आते-जाते रहते हैं. गांव के लोग यह भी बताते हैं कि अचानपुर स्थित वन विभाग के गेस्ट हाउस में कंपनी के लोग हफ्तों रुककर इलाके में छानबीन करते रहते हैं.

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राजधानी रायपुर से एक सौ चालीस किलोमीटर दूर है सोनाखान है. जबकि बाघमाड़ा गांव सोनाखान रास्ते में 10 किलोमीटर पहले पड़ता है. सबसे पहले हमारी टीम इसी गांव में पहुँची. घने जंगल और बार नवापारा अभ्यारण से बाघमाड़ा गांव घिरा हुआ है. जिस तस्वीर को आप देख रहे हैं यह सब बाघमाड़ा गांव की की तस्वीर हैं. इस गांव को बेचने और गांव वालों को विस्थापित करने की कोशिश पूर्व सररकार ने की थी. गांव वाले बताते हैं कि तीसरी बार सत्ता में आने के बाद तत्कालीन रमन सरकार ने इसकी शुरुआत कर दी थी. 2014 में वेदांता को खनन के लिए लीज देने का काम वेदांता को दे दिया गया.

लेकिन जैसे सोनाखान इलाके में जंगल को बेचने की जानकारी गांव वाले, शहीद परिवार और सामाज सेवी संगठनों को लगी सभी ने विरोध शुरू कर दिया. 2014 से लगातार विरोध स्तर पर चलते रहा. गांव वालों ने ग्राम सभा में वेदांता को खनन नहीं करने देने का प्रस्ताव पारित कर दिया. बाघमाड़ा, अरनकपुर , सोनाखान में पंचायतों ने इसका जबर्दस्त विरोध किया. फिर इसके बाद गांव से लेकर शहर और राजधानी तक में विरोध तीव्र होते गई.

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छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक और सोनाखान इलाके में गांव वालों के साथ संघर्ष करने वाले आलोक शुक्ला बताते हैं कि बाघमाड़ा के इसी इलाके की 5 सौ हेक्टयेर जमीन को पूर्व सरकार ने वेदांता के हाथों निलाम कर दिया था. वो भी महज ढाई टन सोना के लिए. हैरानी की बात ये कि तत्कालीन रमन सरकार ने इसके लिए गांव वालों से किसी तरह की अनुमति लेना भी जरूरी समझा. और तो और उस शहीद वीरनारायण सिंह परिवार से भी जिनके मुखिया ने अंग्रेजों से इस इलाके को बचाने आजादी की लड़ाई लड़ी थी. इन्हें अब कॉरपोरेट लॉबी से लड़ने की जरूरत पड़ रही है. हमने पूर्व सरकार के इस नीति का लगातार विरोध किया था.

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वहीं शहीद वीरनारायण सिंह के वंशज राजेन्द्र सिंह का कहना है कि उन्होंने हर मोर्चे पर तत्कालीन सरकार के इस निर्णय का विरोध किया था. वे रायपुर जाकर रमन सिंह से मिलकर विरोध करते रहे. यहां तक कि जब भी वे सोनाखान आए तब भी. जब सोनाखान इलाके को बेचने का फैसला लिया गया था हमें बहुत दुःख हुआ था.

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गांव वालों के साथ बैठीं इस महिला को आप पहचान लीजिए. ये इस इलाके में राजिम दीदी के नाम से प्रसिद्ध हैं. गांव वालों के आंदोलन की अगुवाई इस इलाके में राजिम दीदी ही करती रही हैं. इन्होंने वालों के साथ मिलकर 4 साल तक तत्कालीन सरकार से सोनखान में खनन न हो सके इसके लिए बाघमड़ा से लेकर राजधानी तक संघर्ष किया. राजिम दीदी बताती हैं शुक्र इस आंदोलन में उन्हें संघर्ष तो करना पड़ा लेकिन किसी तरह की कोई हिंसा नहीं हुई.  राजिम दीदी का कहना है कि वेदांता के खिलाफ जब भी कोई शिकायत प्रशासन होती अधिकारी सब डर जाते थे. बलौदाबाजार जिला में आने वाले इस इलाके में कलेक्टर तक की हिम्मत नहीं होती थी कि वे वेदांता के खिलाफ कोई कार्रवाई भी कर दे.  यहां 2014 से लेकर 2018 जो भी कलेक्टर जब उनसे वेदांता के विषय में बात करते वे डर जाते थे. कलेक्टर यही कहते कि वेदांता के मसले पर सरकार से बात करिए. इतनी दशहत एक उद्योगपति की यहां रही है. लेकिन अब खुश हैं कि गांव वालों के पक्ष में आखिर नई सरकार ने फैसला दिया है.

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अब गांव वाले इस बात से बेहद खुश हैं कि सोनखान इलाके में वेदांता को मिली खनन की अनुमति पर नई भूपेश सरकार ने ब्रेक लगा दिया है. गांव वालों का संघर्ष, जल-जंगल-जमीन बचाओ वालों का संघर्ष आखिरकार पूंजीपति ताकत के आगे जीत गया है. अब गांव वाले यही चाहते हैं एक बार उनके मुखिया भूपेश बघेल जरूर इस इलाके में आए. ताकि वे उनका इस ऐतिहासिक निर्णय पर अभिनंदन कर सके.

देखिए बाघमाड़ा से गांव वालों के साथ पूरी बातचीत

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