धान खरीदी के मुद्दे पर सदन में पक्ष-विपक्ष में तकरार, एमएसपी पर खरीदी को भाजपा ने बताया किसानों से धोखा, किया वॉकआउट…

रायपुर। विधानसभा में गुरुवार को धान खरीदी का मुद्दा उठा. खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने की घोषणा को भाजपा ने किसानों के साथ घोखा बताया, जिस पर पक्ष-विपक्ष के बीच नारेबाजी शुरू हो गई. इसके बाद भाजपा ने सदन से वॉकआउट किया.

सदन में धान खरीदी का मुद्दा कांग्रेस विधायक धनेंद्र साहू ने उठाया. उन्होंने पूछा कि सेंट्रल पूल में कितना चावल केंद्र खरीदेगी? खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि केंद्र के साथ अब तक एग्रीमेंट नहीं हुआ है. चावल कितना जमा होगा इसका निर्धारण अब तक नहीं हुआ है. इस पर धनेंद्र साहू ने पूछा कि क्या कारण है कि केंद्र ने अब तक सेंट्रल पूल में चावल लेने अपनी सहमति नहीं दी है? क्या वजह बताई है केंद्र सरकार ने?

मंत्री भगत ने कहा कि 2018-19 में धान खरीदी 80 लाख मीट्रिक टन हुई थी. केंद्र सरकार ने कुछ शर्त रखी थी. पिछले साल राज्य सरकार ने 2500 रुपये समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की थी, लेकिन खरीफ फसल 2020 के लिए अनुमानित उपज 85 लाख मीट्रिक टन जाएगा. केंद्र ने शर्त रखी है कि यदि तय एमएसपी से ज्यादा दर पर खरीदी की जाएगी तो सेंट्रल पूल में चावल नहीं लिया जाएगा.

पिछले दिनों में मुख्यमंत्री ने सदन में कहा है कि केंद्र के तय एमएसपी पर ही खरीदी होगी. केंद्र की हठधर्मिता के सामने हम प्रणाम करते है. अब एमएसपी में राज्य सरकार धान खरीदी की जाएगी. इससे केंद्र की नीति के तहत सेंट्रल पूल में चावल लेने केंद्र सरकार बाध्य होगी.

अमरजीत भगत ने कहा कि सरकार ने 2500 रुपये में धान खरीदी का निर्णय लिया था. लेकिन अब 1850 रुपये की दर पर खरीदी होगी और अंतर की राशि किसानों को देने के लिए कैबिनेट की सब कमेटी जो बनाई गई है. कमेटी तय करेगी कि किसानों को अंतर की राशि कैसे दी जाएगी. बीजेपी ने मंत्री के जवाब पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार किसानों को गुमराह कर रही है.

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की टिप्पणी पर सत्तापक्ष के विधायकों ने आपत्ति की. कौशिक ने कहा कि मुझे नसीहत ना दी जाए, मैं अध्यक्ष से अनुमति लेकर खड़ा हुआ हूं. धनेंद्र साहू ने पूछा कि बीते साल और उससे पहले भी सरकार ने बोनस दिया था. तब केंद्र ने सेंट्रल पूल में चावल लिया था. अब क्यों ऐसी व्यवस्था नहीं है?

मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि इस संदर्भ में हमने केंद्र को पत्र लिखा था. हमने किसानों से 2500 रुपये में धान खरीदी का जो वादा किया है उसे निभाएंगे. केंद्र हमारे सामने ब्रेकर बनकर खड़ा है, इसलिये अभी खरीदी 1850 रुपये में होगी. अंतर की राशि कैबिनेट की सब कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद देंगे.

जेसीसी विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि कैबिनेट की जो सब कमेटी बनाई गई है वह उसका हाल कहीं शराब के लिए बनाई गई कमेटी जैसा ना बन जाए. इस बात पर पक्ष-विपक्ष के बीच नारेबाजी शुरू हो गई. बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा किसानों को सरकार धोखा दे रही है. टिप्पणी पर आसंदी ने कहा कि ये विधानसभा सिर्फ आपके लिए नहीं बनी है. आपको जाना है तो बाहर जाइये. इस पर बीजेपी ने वाकआउट किया.

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूछा कि अंतर की राशि किसानों तक कब तक पहुंच जाएगी? अमरजीत भगत ने कहा कि यह हमारा कमिटमेंट है कि किसी भी हालत में हम अंतर की राशि देंगे. कैबिनेट की सब कमेटी की बैठक बजट सत्र के पहले रखी जायेगी, जिसमे अंतर की राशि देने का फैसला होगा. कौशिक ने पूछा कि देश में किस राज्य में 2500 रुपए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी होगी? यदि किसानों से 2500 रुपये में खरीदी नहीं कर पा रहे हैं, तो किसानों से जाकर सरकार माफी मांग ले.

अजय चंद्राकर ने कहा कि सरकार ने एक तारीख से धान खरीदी शुरू करने की बात कहीं है? सरकार किस दर पर खरीदी करेगी? सरकार सदन में उत्तर दे रही है कि दर निर्धारित नहीं है? खाद्य मंत्री ने कहा कि जो वादा है 2500 रुपये किसानों को देने का वह दिया जाएगा. बीजेपी ने मंत्री के जवाब पर आपत्ति की. बीजेपी विधायकों ने कहा कि यहां सवाल दर को लेकर पूछा जा रहा है कि कितनी दर पर खरीदी होगी.

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों को धान खरीदी का 2500 रुपये ही दिया जाएगा. अजय चंद्राकर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक दिसम्बर से कितनी दर पर खरीदी होगी? सरकार किस दर पर खरीदी करेगी? रविन्द्र चौबे ने कहा कि किसानों को 2500 रुपये ही मिलेगा. इसके बाद बीजेपी विधायकों का सदन में हंगामा किया.

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