स्मृति शेष : देश के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक रहे वीसी शुक्ल की पु्ण्यतिथि आज, झीरमघाटी नक्सल हमले में हुई थी मौत

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वैभव बेमेतरिहा, रायपुर। देश के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक रहे विद्याचरण शुक्ल की आज पुण्यतिथि है. 25 मई 2013 को हुए झीरमघाटी नक्सल हमले में शुक्ल बुरी तरह से घायल हो गए थे. 17 दिनों तक ज़िन्दगी और मौत के बीच वे संघर्ष करते रहे. अंत में दिल्ली स्थिति मेंदाता अस्पताल में 11 में जून को उन्होंने दम तोड़ दिया. उनके निधन से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा. ख़ास तौर पर छत्तीसगढ़ में. क्योंकि छत्तीसगढ़ से अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर 70 के दशक में देश-दुनिया की राजनीति में छा जाने वाले वीसी सियासी हीरो भी रहे और उन्हें आपातकाल के दौर विलेन की भी तरह याद किया जाता है.

25 मई 2013 को जब छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के नारे के साथ कांग्रेस बस्तर में यात्रा निकाल रही थी तब नंदकुमार पटेल के साथ वीसी शुक्ल थे. यात्रा सुकमा के रास्ते बस्तर की ओर आगे बढ़ रही थी. इस दौरान झीरमघाटी में दरभा थाने के करीब नक्सलियों ने हमला कर दिया. हमला इतना बड़ा था कि किसी को भी संभलने का मौका तक नहीं मिला. नक्सलियों ने एक-एक कर सभी नेताओं को निशाना बनाया था. इस घटना में मौके पर तात्कालीन प्रदेश कांग्रेस नंदकुमार पटेल और बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर रहे महेन्द्र कर्मा की मौत हो गई थी. वीसी शुक्ल को भी कई गोलियाँ लगी थी. बुरी तरह घायल शुक्ल को पहले जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया फिर वहाँ से उन्हें दिल्ली से मेंदाता शिफ्ट किया गया. 17 दिनों तक शुक्ल अस्पताल में ज़िन्दगी की जंग लड़ते रहे लेकिन हार गए.

शुक्ल का जन्म 2 अगस्त 1929 में हुआ था. वे मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रहे पं.रविशंकर शुक्ल के छोटे बेटे थे. उनके बड़े भाई श्यामाचरण शुक्ल भी मध्यप्रदेश के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे. वीसी अपने दौर के सबसे कम उम्र के सासंद रहे. उन्होंने पहला चुनाव 28 साल के उम्र में जीता था. वे इंदिरा गाँधी के सबसे विश्वसनीय और करीबी नेता रहे. जब सन् 75 में देश में आपातकाल लगा तो उस वक़्त केन्द्रीय और सूचना प्रसारण मंत्री वीसी थे.

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की थी. वे कांग्रेस के साथ जनता पार्टी की सरकार में भी मंत्री रहे. वे कई बार केन्द्रीय मंत्री रहे. वहीं वे कांग्रेस के साथ ही जनता दल, समाजवादी, एनसीपी और भाजपा में भी रहे. छत्तीसगढ़ जब अलग राज्य बना तब मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार वही थे. लेकिन कांग्रेस ने आदिवासी नेता अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बना दिया. इससे वीसी शुक्ल नाराज हुए और उन्होंने ठीक चुनाव के पहले एनसीपी का दामन थाम लिया. उनके दम पहली बार एनसीपी छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ी. नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस अपने सबसे मजबूत गढ़ में सत्ता से बाहर हो गई. एनसीपी 1 ही सीट जीतने में कामयाब भले रही लेकिन 7 प्रतिशत से अधिक मत पाकर उन्होंने कांग्रेस को सत्ता में पहुँचने से दूर कर दिया. 2003 के बाद फिर वे 2004 के चुनाव में भाजपा में चले गए. लोकसभा चुनाव हारने के बाद वे वापस कांग्रेस में आ गए. इसके बाद वे लगातार कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने में लगे रहे. राजनीति के ऐसे ताकवर नेता की आज पुण्यतिथि है.

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