धर्मेंद्र ओझा, भिंड। देश-प्रदेश में गुलामी के निशान मिटाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। लेकिन मध्य प्रदेश के भिंड में यह काम सरपंच, सचिव और पटवारी ने अपने हाथ में ले लिया है। यही कारण है कि अब उन्होंने बिना किसी की सहमति के ही गांव का नाम बदल डाला। मामले का खुलासा तब हुआ जब, ग्रामीणों ने जनसुनवाई में आदेवन दिया।

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क्या है मामला
दरअसल, 400 सालों की अंग्रेजों और मुस्लिम शासकों की गुलामी के दौरान बदले गए स्थान के नामों को अब केंद्र और राज्य की सरकारें गुलामी के चिन्ह मिटा रही है। वहीं बदलाव के इस दौर में कुछ लोग निजी लाभ भी लेने का प्रयास कर रहे। अपने पुरखों का नाम रखकर गांव के पुराने नाम को मिटाने में लगे हुए है। मामला भिंड कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान सामने आया है। जहां भिंड विधानसभा की नुनंहाटा ग्राम पंचायत के ‘बुढनदिया का पूरा’ को बदलकर ‘महादेव का पूरासी’ कर दिया गया है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि, नाम बदलने की साजिश गांव के ही रहने बाले रामबतार सिंह ने सेक्रेटरी सरपंच और पटवारी की मिली भगत कर अपने स्वर्गीय पिता महादेव सिंह के नाम पर करवा लिया है। गांव का नाम बदलने के दौरान किसी भी ग्रामीण से सहमति नहीं ली गई है। अब ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड सहित सारे शासकीय डॉक्यूमेंट में गांव का नाम बदलवाना पड़ेगा।

लिहाजा एक दर्जन से अधिक ग्रामीण आज एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिला प्रशासन को जनसुनवाई के माध्यम से गांव का पुराना ही नाम “बुढनदिया” रखा रहने को लेकर आवेदन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कलेक्टर ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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