Rajasthan News: राजस्थान के परिवहन विभाग में वीआईपी (थ्री डिजिट) नंबरों के आवंटन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ हैं। जयपुर आरटीओ द्वारा पकड़े गए एक मामले की जांच के लिए गठित विशेष कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब 10 हजार वीआईपी नंबरों में अनियमितता की आशंका जताई है। इस घोटाले से सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने का अनुमान लगाया गया है। कमेटी ने फर्जीवाड़े को संगठित अपराध करार देते हुए स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) से गहन जांच कराने की सिफारिश की हैं।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
- 2018 के बाद का नियम बना हथियार: विभाग के आदेश के तहत वाहन का पंजीयन किसी भी जिले के आरटीओ में करवाया जा सकता है। इसका फायदा उठाकर अधिकारी, बाबू और दलालों ने मिलीभगत कीं।
- बैकलॉग नंबर का खेल: जिस आरटीओ में वीआईपी नंबर उपलब्ध था, वहां से उसे ऑनलाइन बैकलॉग कराया गया। फर्जी आधार, आरसी और अन्य दस्तावेज बनाकर दूसरे जिलों में वाहनों का पंजीयन कर दिया।
- प्रभावित जिले: कोटा, नागौर, जोधपुर, जयपुर, सलूंबर, सवाईमाधोपुर, बूंदी, हनुमानगढ़, उदयपुर, बीकानेर सहित कई जिले शामिल। दौसा आरटीओ की खामोशी ने बढ़ाई शक की सुई
कमेटी ने पाया कि दौसा आरटीओ ने बार-बार लिखित और मौखिक निर्देशों के बावजूद जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी। इसे जांच को प्रभावित करने की कोशिश माना गया है। साथ ही, कई कार्यालयों में रजिस्टर में हेराफेरी, जालसाजी और रिकॉर्ड नष्ट करने के सबूत मिले।
जयपुर से शुरू हुआ खुलासा
जयपुर आरटीओ प्रथम के तत्कालीन अधिकारी राजेन्द्र सिंह शेखावत ने थ्री डिजिट नंबरों में गड़बड़ी पकड़ी। इसके बाद दो कार्मिकों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, जिसके आधार पर पूरे प्रदेश में जांच शुरू हुई।
कमेटी की 5 बड़ी सिफारिशें
- सभी थ्री डिजिट नंबरों की जांच हो, जिन्हें अब तक आवंटित किया गया है।
- फर्जी पंजीयन वाले नंबर निरस्त किए जाएं।
- वीआईपी नंबरों की खुली नीलामी पोर्टल के जरिए हो।
- लिप्त कार्मिकों पर विभागीय + आपराधिक कार्रवाई हो।
- मिलीभगत करने वाले आरटीओ अधिकारियों को दोषी मानकर सजा दी जाए।
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