Waqf Bill: बस कुछ घंटे और लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर (संसद) में देश की सबसे बड़ी और ताकतवर मुस्लिम संस्था वक्फ बोर्ड (Waqf Board) में संशोधन के लिए ‘वक्फ संशोधन बिल’ (Waqf Amendment Bill) पेश होगा। प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे लोकसभा में वक्फ संसोधन विधेयक रखा जाएगा। इस पर चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला 8 घंटे का समय तय किया है। इसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट दिए गए हैं, बाकी वक्त विपक्ष को मिला है। राज्यसभा में इस पर गुरुवार को चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों सदनों में प्रस्तावित कानून पर चर्चा के लिए आठ-आठ घंटे आवंटित किए गए हैं।

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वहीं वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर आज लोकसभा से सड़क तक कड़ा विरोध देखने को मिलेगा। संसद में कांग्रेस समेत सभी पार्टियों के सांसद बिल का विरोध करेंगे। इस दौरान एनडीए सांसदों के साथ तीखी तकरार देखने को मिलेगी। वहीं सड़क पर मुस्लिम संगठनों के लोग प्रदर्शन करेंगे। इसे देखते हुए पूरे देश की पुलिस अलर्ट मोड पर रखा गया है। विशेषकर मुस्लिम बहुल राज्यों में पुलिस अगले 72 घंटे के लिए अलर्ट मोड पर है।

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लोकसभा में एनडीए के पक्ष में पूरा मौहाल है। सत्ता पर काबिज एनडीए गठबंधन के सबसे बड़े घटकों- तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने बिल के पक्ष में समर्थन देने का ऐलान किया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सरकार के रुख का समर्थन करने को कहा है।

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वहीं दूसरी तरफ विपक्ष बिल के विरोध में है। मामले में तमिलनाडु की AIADMK, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति जैसी न्यूट्रल पार्टियां भी विपक्ष के साथ हैं। बीते दिन INDIA ब्लॉक के दलों ने संसद भवन में बैठक करके बिल पर अपनी रणनीति को लेकर चर्चा की।

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क्या है संसद का नंबर गेम

लोकसभा में 542 सदस्यों में एनडीए के 293 सांसद हैं और बीजेपी कई मौकों पर कुछ निर्दलीय सदस्यों का समर्थन हासिल करने में सफल रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक टीडीपी, जेडीयू और चिराग पासवान नीत एलजेपी (रामविलास) जैसे बीजेपी के बड़े सहयोगी दलों ने शुरू में विधेयक के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताई, लेकिन संसद की संयुक्त समिति द्वारा उनके कुछ सुझावों को अपनाए जाने के बाद वे विधेयक का समर्थन कर सकते हैं।

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वक्फ संसोधन विधेयक को समर्थन

कैथलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया, चर्च ऑफ भारत ने मंगलवार को विधेयक के प्रति समर्थन प्रकट किया, जिससे प्रस्तावित कानून को उसके कथित व्यापक अल्पसंख्यक विरोधी एजेंडा का हिस्सा दर्शाने की विपक्ष की कोशिश को धता बताने के सरकार के प्रयासों को बल मिलता हुआ दिखा। पिछले साल विधेयक पेश करते समय सरकार ने इसे दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव किया था।

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सरकार ने मानी नीतीश की सभी मांगें

नीतीश कुमार चाहते थे कि जमीन राज्य का मामला है, वक्फ की जमीन को लेकर राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र बना रहे। वक्फ बिल में ये बात मान ली गई है। नीतीश कुमार चाहते थे कि नया कानून पुरानी तारीख से लागू ना हो, पुरानी मस्जिदों, दरगाह या अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थानों से छेड़छाड़ ना हो, ये बात भी बिल में मानी गई है। साथ ही वक्फ की संपत्ति है या नहीं ये तय करने के लिए राज्य सरकार कलेक्टर रैंक से ऊपर के अधिकारी को नियुक्त कर सके. इस मांग को भी मान लिया गया है। यानी मुफ्ती हों या मौलाना हों या फिर विपक्ष के दांव पेच हो, फिलहाल वक्फ संशोधन बिल को लेकर मोदी के समर्थन का जो हाथ नीतीश कुमार ने पकड़ा, उसे कोई हिला या डिगा नहीं पा रहा है।

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फरवरी में कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी थी

कैबिनेट ने 19 फरवरी को वक्फ संशोधन बिल को मंजूरी दी थी। बिल पर बनी जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की रिपोर्ट के आधार पर वक्फ बिल का नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है। बिल पर JPC की रिपोर्ट बजट सत्र के पहले फेज में 13 फरवरी को संसद में पेश हुई थी। कमेटी ने 30 जनवरी को 655 पन्नों रिपोर्ट स्पीकर ओम बिरला को सौंपी थी। इस दौरान JPC अध्यक्ष जगदंबिका पाल, निशिकांत दुबे सहित अन्य भाजपा सांसद मौजूद रहे थे। हालांकि विपक्ष का कोई सांसद नजर नहीं आया था।

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विपक्षी सांसदों ने रिपोर्ट का विरोध किया था

कमेटी में शामिल विपक्षी सांसदों ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी। 16 सदस्यों ने रिपोर्ट के पक्ष में, जबकि 11 ने विरोध में वोट डाला। बाकी सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था- 655 पन्नों की रिपोर्ट एक रात में पढ़ना असंभव था। मैंने रिपोर्ट पर असहमति जताई है।वहीं, JPC सदस्य DMK सांसद ए राजा ने कहा था कि भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने समिति की कार्यवाही अपनी मर्जी से चलाई। मुझे लगता है कि रिपोर्ट भी पहले से तैयार थी। यह बिल पास हो जाता है तो हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

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बिल के विरोध में काली पट्‌टी बांधकर ईद की नमाज पढ़ी

वक्फ बिल के विरोध में कई जगह मुस्लिमों ने काली पट्टियां बांधकर ईद की नमाज अदा की। रमजान के आखिरी जुमा (जुमातुल विदा) 28 मार्च को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने देशभर के मुसलमानों से काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने जाने को कहा था।

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