पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर डर से हुई मौतों के आरोप बढ़ते जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब विवादों में है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दो लोगों की मौत के बाद परिजनों ने मानसिक तनाव को कारण बताया है. सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया है कि SIR से जुड़ी चिंता के चलते 77 मौतें हो चुकी हैं. कोलकाता में BLO कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज क्षेत्र में 50 साल के दिहाड़ी मजदूर लक्ष्मीकांत राय की सोमवार को बाजार में अचानक गिरकर मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, वह धंकैली बाजार में मौजूद थे, तभी अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. उन्हें तुरंत कालियागंज स्टेट जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

मतदाता सूची से नाम कट जाने का डर, नोटिस मिलने की बेचैनी और अधिकार छिन जाने की आशंका, पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती नजर आ रही है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से दो मौतों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासनिक प्रक्रिया का बोझ आम नागरिकों पर पड़ रहा है?

कोलकाता में BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि अत्यधिक काम के दबाव के कारण कई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है. प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प की भी खबर आई.

परिजनों का आरोप है कि लक्ष्मीकांत राय को हाल ही में SIR सुनवाई के लिए नोटिस मिला था, उनको हाल ही में 19 जनवरी को SIR की सुनवाई में शामिल होने के लिए नोटिस मिला था. जिसके बाद से वह गहरे मानसिक तनाव में थे. परिवार का कहना है कि उन्हें डर था कि 2002 की मतदाता सूची में नाम न होने के कारण उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है, उनके बेटे हीरू राय ने कहा, ‘नोटिस मिलने के बाद से पापा ने खाना-पीना छोड़ दिया था, काम पर भी नहीं जा रहे थे.’

एक और दर्दनाक घटना उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट क्षेत्र के बडूरिया से सामने आई. यहां अनीता बिस्वास, एक बुजुर्ग महिला, की स्ट्रोक के बाद मौत हो गई. परिवार का दावा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान सुनवाई में शामिल होने के बाद से वह तनाव में थीं. उनके बेटे काशीनाथ बिस्वास ने बताया कि उनकी मां का नाम 1995 की मतदाता सूची में था, लेकिन 2002 की सूची में गायब था.  5 जनवरी को दस्तावेज जमा किए, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. इसके बाद मां लगातार परेशान रहने लगीं.

इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं. तृणमूल कांग्रेस नेता निताई वैश्य ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया, जबकि बीजेपी युवा नेता गौरांग दास ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया. पुलिस का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा.

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