सोने की झाड़ू और चंदन का पानी, क्यों इतनी खास होती है 'छेरा पहरा' रस्म?
सोने की झाड़ू और चंदन का पानी, क्यों इतनी खास होती है 'छेरा पहरा' रस्म?
इस साल 16 जुलाई से जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है
इस साल 16 जुलाई से जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है
इस दौरान कई रस्में निभाई जाती हैं, उन्हीं में से एक छेरा पहरा रस्म है
इस दौरान कई रस्में निभाई जाती हैं, उन्हीं में से एक छेरा पहरा रस्म है
छेरा पहरा रथ यात्रा से जुड़ी एक बहुत जरूरी परंपरा है
छेरा पहरा रथ यात्रा से जुड़ी एक बहुत जरूरी परंपरा है
इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों की प्रतीकात्मक सफाई की जाती है
इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों की प्रतीकात्मक सफाई की जाती है
इसे सिर्फ सफाई का काम नहीं माना जाता है, बल्कि ये सेवा, समर्पण और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती है
इसे सिर्फ सफाई का काम नहीं माना जाता है, बल्कि ये सेवा, समर्पण और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती है
इस रस्म का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भगवान के सामने कोई कितना भी बड़ा या राजा क्यों न हो
इस रस्म का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भगवान के सामने कोई कितना भी बड़ा या राजा क्यों न हो
उनकी नजर में ये मायने नहीं रखती है। उनकी नजर में हर कोई बराबर है.
उनकी नजर में ये मायने नहीं रखती है। उनकी नजर में हर कोई बराबर है.
इस परंपरा का संबंध राजा इंद्रद्युम्न से है। कहा जाता है कि भगवान के आदेश पर उन्होंने ही यह सेवा की थी.
इस परंपरा का संबंध राजा इंद्रद्युम्न से है। कहा जाता है कि भगवान के आदेश पर उन्होंने ही यह सेवा की थी.
जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी का रहस्य, क्यों इस पर पैर नहीं रखते लोग
Learn more