क्या किसी आम आदमी को भी मिल सकती है Z+ सिक्योरिटी, जानिए
क्या किसी आम आदमी को भी मिल सकती है Z+ सिक्योरिटी, जानिए
एक आम नागरिक को भी Z+ सुरक्षा मिल सकती है अगर खुफिया एजेंसी यह तय करें कि उनकी जान को काफी ज्यादा खतरा है.
एक आम नागरिक को भी Z+ सुरक्षा मिल सकती है अगर खुफिया एजेंसी यह तय करें कि उनकी जान को काफी ज्यादा खतरा है.
सुरक्षा कैटेगरी का फैसला पूरी तरह से खुफिया एजेंसियों द्वारा खतरे की जांच के दौरान पहचाने गए जोखिम के स्तर पर निर्भर करता है.
सुरक्षा कैटेगरी का फैसला पूरी तरह से खुफिया एजेंसियों द्वारा खतरे की जांच के दौरान पहचाने गए जोखिम के स्तर पर निर्भर करता है.
अगर खतरा काफी ज्यादा गंभीर माना जाता है तो व्यक्ति के पेशे या फिर सामाजिक रुतबे की परवाह किए बिना सुरक्षा दी जा सकती है.
अगर खतरा काफी ज्यादा गंभीर माना जाता है तो व्यक्ति के पेशे या फिर सामाजिक रुतबे की परवाह किए बिना सुरक्षा दी जा सकती है.
प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर शुरू होती है. सुरक्षा चाहने वाले व्यक्ति को सबसे नजदीकी पुलिस स्टेशन या फिर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस
प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर शुरू होती है. सुरक्षा चाहने वाले व्यक्ति को सबसे नजदीकी पुलिस स्टेशन या फिर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या सब डिविजनल मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारियों को लिखित आवेदन देना होगा.
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या सब डिविजनल मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारियों को लिखित आवेदन देना होगा.
आवेदन में खतरे की प्रकृति साफ तौर पर बताई जानी चाहिए और धमकी भरे कॉल, मैसेज, चिट्ठी या फिर दूसरी जानकारी के सबूत भी शामिल होने चाहिए.
आवेदन में खतरे की प्रकृति साफ तौर पर बताई जानी चाहिए और धमकी भरे कॉल, मैसेज, चिट्ठी या फिर दूसरी जानकारी के सबूत भी शामिल होने चाहिए.
अनुरोध मिलने के बाद गृह विभाग इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी खुफिया एजेंसी से जांच करवा सकता है.
अनुरोध मिलने के बाद गृह विभाग इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी खुफिया एजेंसी से जांच करवा सकता है.
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