Emergency in India: भारत में कितनी तरह की लगाई जा सकती है इमरजेंसी, जानें

भारत में इन दिनों हालात तेजी से बदल रहे हैं.

पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान-अमेरिका विवाद, तेल संकट, महंगाई और आर्थिक दबाव जैसे संकट के बीच भारत में इमरजेंसी शब्द की चर्चा फिर से होने लगी है.

प्रधानमंत्री मोदी की लोगों से पेट्रोल-डीजल कम खर्च करने, विदेश यात्राओं से बचने, सोना कम खरीदने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की है

ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत में कितने प्रकार की इमरजेंसी लगाई जा सकती है और इसे कौन लागू करता है.

भारतीय संविधान के भाग-18 में अनुच्छेद 352 से 360 तक आपातकाल से जुड़े नियम दिए गए हैं.

संविधान के अनुसार देश में तीन प्रकार की इमरजेंसी लगाई जा सकती है. जिसमें राष्ट्रीय आपातकाल, राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) और वित्तीय आपातकाल शामिल है

इन तीनों की परिस्थितियां और असर अलग-अलग होते हैं.

राष्ट्रीय इमरजेंसी सबसे बड़ी और गंभीर आपात स्थिति मानी जाती है. अगर देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा हो तो राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं.

यह तीन परिस्थितियों में लगाया जा सकता है. जिसमें पहला जब भारत किसी दूसरे देश के साथ युद्ध की स्थिति में हो

वहीं दूसरा अगर कोई विदेशी ताकत भारत पर हमला कर दे और तीसरा अगर देश के अंदर हथियारों के साथ सरकार के खिलाफ बड़ा विद्रोह हो जाए.

राष्ट्रीय आपातकाल राष्ट्रपति लागू करते हैं, लेकिन वह ऐसा अकेले नहीं कर सकते हैं. इसके लिए केंद्र सरकार की मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह जरूरी होती है

इसके बाद संसद के दोनों सदनों से एक महीने के अंदर मंजूरी लेना जरूरी होता है.

भारत में अब तक तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जा चुका है. जिसमें पहली बार 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान

वहीं दूसरी बार 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय और तीसरी बार 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi की सरकार ने इमरजेंसी लागू की थी.