कब और किसने की थी लालबागचा राजा की पहली स्थापना, जानें

पूरे भारत में गणेश चतुर्थी का त्योहार काफी ज्यादा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.

गणेश जी की सबसे मशहूर मूर्तियों में से एक है 'लालबागचा राजा'. इसका इतिहास मुंबई के मजदूरों, मछुआरों और व्यापारियों के संघर्षों से गहराई से जुड़ा है.

लालबागचा राजा की पहली स्थापना 12 सितंबर 1934 को मुंबई के लालबाग परेल इलाके में हुई थी.

स्थानीय मछुआरों, व्यापारियों और मिल मजदूरों ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई.

साथ ही कुंवर जी जेठाभाई शाह, श्यामराव विष्णु बोधे, रामचंद्र तावड़े, वी.बी.कोरगांवकर और नखावा कोकम मामा जैसे स्थानीय नेताओं और निवासियों ने सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना में मदद किया.

मुश्किल दौर में बेघर हुए व्यापारियों और कोली मछुआरों ने भगवान गणेश से एक नवस यानी धार्मिक मन्नत मांगी.

उन्होंने प्रार्थना की कि अगर उन्हें कोई स्थायी जगह मिल जाए जहां वे अपना कारोबार कर सकें तो वे सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन करेंगे और आभार जताने के लिए वहां गणपति बप्पा की स्थापना करेंगे.

यह मन्नत आगे चलकर लालबाग की कहानी का एक जरूरी हिस्सा बन गई. इसने इस त्योहार को समुदाय की आजीविका और स्थायी बाजार के संघर्ष से सीधे तौर पर जोड़ दिया.

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