हनुमान जयंती: जानें कैसे शिव के अंशावतार में जन्मे बजरंगबली...

चैत्र पूर्णिमा पर आज 2 अप्रैल को धूमधाम से हनुमान जयंती मनाई जा रही है.

इस पावन दिन पर जानिए कैसे शिव 11वें रुद्रावतार के रूप में पवनपुत्र बजरंगबली ने लिया जन्म.

हनुमान जी के जन्म को लेकर रामायण, शिव पुराण, सकंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है.

इन सभी को हनुमान को शिव का 11वां रुद्रावतार बताया गया है.

कथाओं के अनुसार, अंजना एक अप्सरा थी. ऋषि के श्राप के कारण उसे पृथ्वी पर वानर रूप में जन्म लेना पड़ा.

श्राप से मुक्ति के लिए अंजना ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की. अंजना की तपस्या से और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया.

अंजना जब शिवजीकी तपस्या कर रही थीं, उसी समय अयोध्या के राजा दशरथ भी अपनी पत्नियों के साथ पुत्रेष्टि के लिए यज्ञ करा रहे थे.

यज्ञ से अग्निदेव प्रसन्न हुए और प्रकट होकर राजा दशरथ को दिव्य खीर का प्रसाद दिया.

राजा ने अपनी तीनों रानियों में इस खीर को बांट दिया. लेकिन इस दिव्य खीर प्रसाद के साथ एक अद्भुत घटना भी घटी.

दोनों रानियों ने खीर ग्रहण कर लिया. लेकिन रानी कैकयी का खीर एक चील झपट्टा मारकर ले उड़ा. उड़ते हुए चील अंजना के आश्रम से होकर गुजरा.

तभी वायु देव की प्रेरणा से उड़ते हुए चील से खीर का प्रसाद अंजना के हाथों में गिरा, जिसे उसने भगवान का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लिया.

इस दिव्य संयोग और भगवान शिव के आशीर्वाद से अंजना के गर्भ से एक अत्यंत बलशाली बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम मारुति रखा गया.

ऑफिस इवेंट के लिए चुनें लाइटवेट सीक्वेंस साड़ियां, देखें डिजाइंस