कैसे पड़ा बद्रीनाथ नाम ? इस धाम के 5 रहस्य नहीं जानते होंगे आप
कैसे पड़ा बद्रीनाथ नाम ? इस धाम के 5 रहस्य नहीं जानते होंगे आप
इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल आज से भक्तों के लिए खुल गए हैं
इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल आज से भक्तों के लिए खुल गए हैं
आइए जानते हैं बद्रीनाथ धाम से जुड़े खास रहस्य.
आइए जानते हैं बद्रीनाथ धाम से जुड़े खास रहस्य.
बद्रीनाथ को को सृष्टि का आववां बैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं.
बद्रीनाथ को को सृष्टि का आववां बैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं.
एक बार विष्णु जी जब ध्यान मुद्रा में लीन थे तो बर्फबारी के कारण वह पूरी तरह बर्फ से ढक गए. मां लक्ष्मी चिंतित हो गईं फिर उन्होंने विष्णु जी के पास एक बेर वृक्ष का रूप ले लिया.
एक बार विष्णु जी जब ध्यान मुद्रा में लीन थे तो बर्फबारी के कारण वह पूरी तरह बर्फ से ढक गए. मां लक्ष्मी चिंतित हो गईं फिर उन्होंने विष्णु जी के पास एक बेर वृक्ष का रूप ले लिया.
जब श्रीहरि का तप पूरा हुआ तो उन्होंने माता को वृक्ष रूप में बर्फ से ढका पाया. तुमने मेरी रक्षा बद्री वृक्ष के रूप में की है
जब श्रीहरि का तप पूरा हुआ तो उन्होंने माता को वृक्ष रूप में बर्फ से ढका पाया. तुमने मेरी रक्षा बद्री वृक्ष के रूप में की है
इसलिए आज से मुझे बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा. इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ पड़ा.
इसलिए आज से मुझे बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा. इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ पड़ा.
इसलिए आज से मुझे बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा. इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ पड़ा.
इसलिए आज से मुझे बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा. इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ पड़ा.
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