1950 में कैसे चलती थी आम आदमी की रसोई, तब कितनी थी आटा तेल की कीमत
1950 में कैसे चलती थी आम आदमी की रसोई, तब कितनी थी आटा तेल की कीमत
आज के दौर में महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है.
आज के दौर में महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है.
लेकिन साल 1950 में हालात अलग थे और उस समय जरूरी चीजें चंद पैसों या रुपयों में मिल जाती थीं.
लेकिन साल 1950 में हालात अलग थे और उस समय जरूरी चीजें चंद पैसों या रुपयों में मिल जाती थीं.
बाजार में गेहूं का आटा 40 से 45 रुपये प्रति किलो, अरहर की दाल 150 से 180 रुपये प्रति किलो और सरसों का तेल 140 से 160 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है.
बाजार में गेहूं का आटा 40 से 45 रुपये प्रति किलो, अरहर की दाल 150 से 180 रुपये प्रति किलो और सरसों का तेल 140 से 160 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है.
वहीं, शुद्ध देसी घी की बात करें तो इसके दाम 600 से 700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.
वहीं, शुद्ध देसी घी की बात करें तो इसके दाम 600 से 700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.
सब्जियों और मसालों की कीमतें भी लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही हैं.
सब्जियों और मसालों की कीमतें भी लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही हैं.
अब बात करते हैं साल 1950 की, जब भारत अपनी आजादी के शुरुआती सालों में था और देश की अर्थव्यवस्था का स्वरूप बिल्कुल अलग था.
अब बात करते हैं साल 1950 की, जब भारत अपनी आजादी के शुरुआती सालों में था और देश की अर्थव्यवस्था का स्वरूप बिल्कुल अलग था.
उस वक्त देश में मुद्रा का मूल्य बहुत अधिक था और एक रुपये में 16 आने हुआ करते थे.
उस वक्त देश में मुद्रा का मूल्य बहुत अधिक था और एक रुपये में 16 आने हुआ करते थे.
रसोई की अन्य मुख्य चीजों पर नजर डालें तो साल 1950 में चावल लगभग 12 पैसे प्रति किलो के भाव में उपलब्ध था.
रसोई की अन्य मुख्य चीजों पर नजर डालें तो साल 1950 में चावल लगभग 12 पैसे प्रति किलो के भाव में उपलब्ध था.
इसके साथ ही मिठास घोलने वाली चीनी की कीमत लगभग 40 पैसे प्रति किलो हुआ करती थी.
इसके साथ ही मिठास घोलने वाली चीनी की कीमत लगभग 40 पैसे प्रति किलो हुआ करती थी.
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