‘लंकेश की लंका’ में कैसे मनाते हैं दशहरा,जानिये क्या वहां भी होता है रावण दहन?

भारत में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है.

इस दिन देश के कोने-कोने में रामलीला के मंचन के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के ऊंचे-ऊंचे पुतले जलाए जाते हैं.

भारत में जिसे अहंकार और बुराई के प्रतीक के रूप में हर साल जलाया जाता है, उसी रावण को श्रीलंका के इतिहास में एक अलग नजरिए से देखा जाता है.

श्रीलंका के कई हिस्सों में आज भी उसे एक कुशल प्रशासक और शिव भक्त के रूप में याद किया जाता है.

इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण के कारण वहां कभी भी रावण के पुतले जलाने की कोई परंपरा विकसित नहीं हुई है

क्योंकि वे इसे अपनी प्राचीन संस्कृति के एक शक्तिशाली सम्राट के रूप में देखते हैं.

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