देश में कितने जंतर-मंतर, किसने और क्यों बनवाया था इन्हें?
इस वक्त दिल्ली का जंतर मंतर राजनीतिक हलचलों के चलते सुर्खियों में बना हुआ है.
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और आज उनके अनशन का 20वां दिन है.
अक्सर जब भी दिल्ली में किसी बड़े प्रदर्शन की बात होती है तो लोगों को वहां का जंतर-मंतर याद आता है.
इन खलोगीय वेधशालाओं का निर्माण आमेर से प्रसिद्ध शासक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में करवाया था.
उन्होंने अपने जीवनकाल में देश के अलग-अलग हिस्सों में कुल पांच जंतर-मंतर बनवाए थे, जिनका मुख्य उद्देश्य भारतीय खगोल विज्ञान को नई दिशा देना और गणनाओं को बिल्कुल सटीक बनाना था.
अब देश में सिर्फ चार जंतर-मंतर ही सुरक्षित बचे हैं
मथुरा का जंतर-मंतर समय के साथ पूरी तरह से समाप्त हो गया और आज इसके मूल अवशेष भी नहीं बचे हैं.
दिल्ली में स्थित जंतर मंतर को महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवाई गई सबसे पहली वेधशाला माना जाता है, जिसका निर्माण साल 1724 में हुआ था.
जयपुर का जंतर-मंतरजयपुक में स्थित जंतर-मंतर पूरे देश में सबसे बड़ा, भव्य और सबसे बेहतर स्थिति में संरक्षित खगोलीय परिसर है.
उज्जैन और वाराणसी का जंतर-मंतरजयपुर के अलावा महाराजा जय सिंह ने उज्जैन और वाराणसी में भी इन वेधशालाों की स्थापना की थी.
उज्जैन और वाराणसी का जंतर-मंतरजयपुर के अलावा महाराजा जय सिंह ने उज्जैन और वाराणसी में भी इन वेधशालाों की स्थापना की थी.