संसद में बोलने के लिए कितना मिलता है वक्त, जानिये यह कैसे होता है तय?

संसद के मानसून सत्र में इस वक्त एंटी लीक पेपर बिल पर चर्चा चल रही है.

चलिए जानते है कि आखिर सांसदों को सदन में बोलने का वक्त कौन देता है.

संसद में चर्चा के दौरान किस राजनीतिक पार्टी को कितने मिनट या घंटे बोलने की इजाजत मिलेगी, इसका सीधा संबंध उस पार्टी के कुल सांसदों की संख्या के जरिए तय होता है.

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी द्वारा बहस का कुल वक्त तय किए जाने के बाद, लोकसभा अध्यक्ष हर पार्टी के सांसदों के अनुपात में उस वक्त को बांट देते हैं.

यही वजह है कि ज्यादा सीटों वाली सत्तारूढ़ या विपक्षी पार्टियों को अपनी बात विस्तार से रखने का पूरा मौका मिलता है

जबकि कम सांसदों वाली पार्टियों को अपनी बात संक्षेप में और सीमित वक्त में ही खत्म करनी होती है.

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