राज्यसभा में कितना ताकतवर होता है डिप्टी लीडर का पद, जिससे राघव चड्ढा को 'आप' ने हटाया

राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया है. अब यह जिम्मेदारी अशोक मित्तल को सौंप दी गई है.

लेकिन इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर राज्यसभा में यह पद कितना ताकतवर है.

राज्यसभा में डिप्टी लीडर का पद सिर्फ एक औपचारिक पदवी नहीं है.

यह किसी भी राजनीतिक दल की संसदीय व्यवस्था के अंदर एक बड़ी कार्यकारी भूमिका है.

इस पद पर आसीन व्यक्ति लीडरशिप के फैसलों और सदन के अंदर उनके जमीनी एग्जीक्यूशन के बीच एक ब्रिज का काम करता है.

डिप्टी लीडर की सबसे बड़ी ताकत में से एक है पार्टी के बोलने के समय का प्रबंधन करना.

संसदीय कार्यवाही में समय सीमित और काफी मूल्यवान होता है.

डिप्टी लीडर यह तय करता है कि कौन सा सांसद कब, कितने समय के लिए और किस मुद्दे पर बोलेगा.

इसका सीधा असर किसी सांसद की विजिबिलिटी और बहस के दौरान पार्टी के संदेश पर पड़ता है.

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