इस देश में हाउस नंबर नहीं हाउस नेम का होता है इस्तेमाल, जानें क्या है सिस्टम

दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां पर घरों के नंबर नहीं बल्कि नाम होते हैं.

आइए जानते हैं कौन सी है वह जगह और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत.

घरों के नाम रखने की यह प्रथा सदियों पुरानी है और इसकी शुरुआत असल में आमिर जमीदारों और कुलीन लोगों के बीच हुई थी.

बड़ी-बड़ी जागीरों, किलों और आलीशान हवेलियों के नाम अक्सर ऐसे रखे जाते थे

जो उनके परिवार की वंशावली, रुतबे या जगह को दर्शाते थे. 'मैनर हाउस' या 'जागीर' जैसे नाम सिर्फ पहचान बताने के लिए नहीं थे बल्कि वह प्रतिष्ठा के प्रतीक भी थे.

समय के साथ यह परंपरा आम घरों तक भी पहुंच गई और घरों के नाम रखना लोगों के लिए अपनी संपत्ति को एक खास पहचान देने का तरीका बन गया.

घर का नाम रखना सिर्फ सुविधा की बात नहीं है बल्कि यह घर के व्यक्तित्व को भी दर्शाता है.

नंबर वाले घर के मुकाबले नाम वाला घर अक्सर ज्यादा अनोखा और यादगार लगता है.

ग्रामीण इलाकों में यह एक खास रुतबे या फिर आकर्षण से भी जुड़ा होता है.

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